-नरेश वत्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 76वां जन्मदिन इस बार केवल एक राजनीतिक आयोजन भर नहीं है। भाजपा इसे प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जोड़ रही है। 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ में देशभर में सेवा, स्वच्छता, रक्तदान, जनसंपर्क और लाभार्थी संपर्क जैसे कार्यक्रम किए जा रहे हैं। (BJP)
लेकिन मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन को केवल जन्मदिन या सरकारी योजनाओं की उपलब्धियों के नजरिए से देखना इस राजनीतिक यात्रा को छोटा कर देगा। मोदी की राजनीति को मोटे तौर पर तीन चरणों में देखा जाना चाहिए । पहला, संगठन का नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी और अब प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी का तीसरा कार्यकाल। (BJP)
भारतीय राजनीति में ‘मोदी युग’
मोदी की राजनीतिक यात्रा सत्ता के गलियारों से शुरू नहीं हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन में लंबे समय तक काम करने ने उन्हें चुनावी राजनीति से पहले संगठन की राजनीति समझने का अवसर दिया।यही कारण है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उनकी राजनीति में संगठन एक केंद्रीय तत्व बना रहा। बूथ से लेकर लाभार्थी तक और कार्यकर्ता से लेकर सोशल मीडिया तक भाजपा की चुनावी मशीनरी का विस्तार मोदी काल की राजनीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता रही है। (BJP)
गुजरात बना मोदी मॉडल की पहली प्रयोगशाला
7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके साथ उनकी राजनीति का दूसरा चरण शुरू हुआ। गुजरात में विकास, प्रशासन, निवेश और मजबूत नेतृत्व की जो राजनीतिक छवि बनी, उसने आगे चलकर राष्ट्रीय राजनीति में ‘गुजरात मॉडल’ को एक राजनीतिक ब्रांड बना दिया। भाजपा ने अलग-अलग सामाजिक समूहों को अपने व्यापक राजनीतिक आधार में शामिल करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई। राजनीतिक अध्ययनों से ये पता चला कि गुजरात में भाजपा ने ओबीसी, दलित और आदिवासी समूहों तक अपना आधार विस्तार किया। (BJP)
मोदी युग में बदली भाजपा की सामाजिक पहचान
2014 के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या भाजपा अपनी पारंपरिक शहरी और उच्च जाति समर्थक पार्टी की छवि से आगे निकल सकती है? मोदी का ओबीसी पृष्ठभूमि से आना इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बना। भाजपा ने गैर-यादव ओबीसी, गैर-जाटव दलित, आदिवासी और अन्य पिछड़े सामाजिक समूहों के बीच अपना आधार बढ़ाने की रणनीति अपनाई। इसका मतलब कतई नहीं कि भाजपा की पारंपरिक सामाजिक संरचना समाप्त हो गई है। हाल में नीतिन नबीन की टीम में भी ऊंची जातियों की मजबूत मौजूदगी दिखाई देती है। यही मोदी युग की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक विशेषताओं में से एक है। भाजपा ने अपनी पुरानी सामाजिक ताकत को बनाए रखते हुए नए सामाजिक समूहों को जोड़ने की कोशिश करते हूए सफलता पाई है। (BJP)
2024 आम चुनाव बने मोदी के लिए पहली बड़ी राजनीतिक चेतावनी
2014 और 2019 में भाजपा को अपने दम पर बहुमत मिला था। 2024 में तस्वीर बदल गई भाजपा 303 से घटकर 240 लोकसभा सीटों पर आ गई और सरकार बनाने के लिए उसे एनडीए सहयोगियों की जरूरत पड़ी। पहली बार मोदी युग में भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। लेकिन इसके बाद की राजनीति को भाजपा ने बदल दिया। 2026 में पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में भाजपा के प्रदर्शन ने यह दिखाया कि 2024 का झटका भाजपा के राष्ट्रीय विस्तार की कहानी का अंतिम अध्याय नहीं था। 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा की कई राज्यों में स्थिति फिर मजबूत हुई। इसलिए मोदी की राजनीति को केवल ‘2014 की विजय’ या ‘2024 के कमजोर प्रदर्शन’ से समझना सही नहीं है। भारतीय चुनावी राजनीतिक का महत्वपूर्ण पहलू है चुनावी झटके के बाद भाजपा किस तरह अपनी रणनीति को पुनर्गठित करती है। (BJP)
क्या मोदी ने जातीय राजनीति का पैटर्न तोड़ दिया?
मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने निश्चित रूप से अपनी गुजरात मॉडल का अनुभव लेते हुए सामाजिक पहुंच को पारंपरिक आधार से कहीं आगे बढ़ाया है। ओबीसी नेतृत्व इसका सबसे बड़ा प्रतीक है। लेकिन यह कहना कि जाति की राजनीति समाप्त हो गई है। यह कहना सही नहीं होगा। समाजवादी पार्टी जैसे राजनीतिक दलों का आधार जाति पर आधारित है। लोकसभा 2024 चुनाव में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीतिक समीकरण ने भाजपा के सामाजिक समीकरण को चुनौती दी। इसलिए कहा जाता है कि मोदी युग में जाति खत्म नहीं हुई बल्कि जातीय राजनीति का स्वरूप बदल गया। (BJP)
अब सामने अमेरिका की आर्थिक चुनौती
मोदी के 76वें जन्मदिन पर घरेलू राजनीति के साथ अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौती भी सामने है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता के बाद अमेरिका की ओर से रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चर्चा ने भारत के सामने गंभीर व्यापारिक और रणनीतिक प्रश्न खड़े किए हैं। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता भी इसी दबाव के बीच चल रही है।लेकिन भारत के पास केवल अमेरिका पर निर्भर रहने का विकल्प नहीं है। मोदी सरकार ने यूरोपीय संघ के साथ जनवरी 2026 में मुक्त व्यापार समझौते की वार्ताएं पूरी की थीं। यूरोपीय संघ भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत ने न्यूजीलैंड के साथ भी 2026 में एफटीए किया है और पिछले कुछ वर्षों में कई व्यापार समझौतों की दिशा में आगे बढ़ा है। मसलन, यूरोप के साथ बाजार विस्तार, ब्रिटेन और अन्य साझेदारों के साथ व्यापार को लेकर समझौते किए हैं और अमेरिका के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखा है। (BJP)
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मोदी की राजनीति का अगला चरण
मोदी युग की सबसे बड़ी विशेषता रही है कि हर राजनीतिक चुनौती के बाद भाजपा ने अपना राजनीतिक प्रभाव बदलने की कोशिश की है।इसलिए ‘मोदी युग’ का असली सवाल यह नहीं है कि मोदी ने भाजपा को कितना बड़ा बनाया। सवाल यह है कि मोदी के बाद कौन?
आज भाजपा का राष्ट्रीय चेहरा मोदी हैं। लेकिन मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा अब यह होगी भाजपा का बना सामाजिक और चुनावी गठबंधन कितनी मजबूती से आकार लेता है। यही वजह है कि आज का जन्मदिन महज उत्सव नहीं, बल्कि ‘मोदी युग’ की अब तक की यात्रा और उसके अगले अध्याय का राजनीतिक पड़ाव है। (BJP)
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