Mumbai: बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आलोक अराधे और न्यायमूर्ति संदीप मार्ने की पीठ ने महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार को मध्य मुंबई के दादर स्थित सावरकर सदन को पुरातात्विक धरोहर( हेरीटेज) का दर्जा देने के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने सवाल उठाया है कि अगर जिन्ना हाउस को धरोहर का दर्जा प्राप्त है, तो ‘सावरकर सदन’ को क्यों नहीं।
पंकज के. फडणवीस के नेतृत्व वाले हिंदू संगठन अभिनव भारत कांग्रेस द्वारा दायर एक जनहित याचिका में, ‘सावरकर सदन’ की इमारत को पुरातात्विक धरोहर के रूप में संरक्षित करने का अनुरोध किया गया है। दादर के शिवाजी पार्क इलाके में स्थित सावरकर सदन कभी स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर का निवास स्थान हुआ करता था।
बीएमसी ने भी सरकार को लिखा था पत्र
गौरतलब है कि मुंबई हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी (एमएचसीसी) ने इस संरचना को पुरातात्विक धरोहर का दर्जा देने की सिफारिश की थी। इसके बाद, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने सरकार को यह दर्जा देने के लिए पत्र लिखा था। हालांकि, अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है। सरकारी वकीलों ने पीठ को सूचित किया कि एमएचसीसी को एक नई सिफारिश करनी होगी। इसके बाद, अदालत ने इसके पीछे का कारण पूछा।
6 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
पीठ ने पूछा कि पिछली सिफारिश में क्या समस्या है? चूंकि एमएचसीसी ने सिफारिश की थी, इसलिए मुंबई मनपा ने सरकार को पत्र लिखकर इसे ग्रेड II हेरिटेज संरचना घोषित करने का अनुरोध किया। पीठ ने सरकार और मनपा दोनों को हलफनामा दाखिल करने को कहा और मामले की सुनवाई 6 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

