
-नरेश वत्स
Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र के पहले दो सप्ताह राजनीतिक टकराव, विपक्ष के लगातार विरोध और सीमित विधायी कामकाज के नाम रहे। 20 जुलाई से शुरू हुए सत्र में विपक्ष ने कथित नीट पेपर लीक, छात्रों के आंदोलन, राम मंदिर चढ़ावा चोरी और अन्य मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। कई दिनों तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही। इसके बावजूद मोदी सरकार ने उपलब्ध समय का उपयोग करते हुए कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफलता हासिल की। (Monsoon Session 2026)
दो सप्ताह का विधायी लेखा-जोखा
इन दो हफ्तों में हंगामे के बावजूद सरकार ने लोकसभा से तीन और राज्यसभा से दो विधेयक पारित कराए। सबसे प्रमुख रूप से शुक्रवार को लोकसभा ने जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रीकरण (संशोधन) विधेयक पारित किया। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से यह विधेयक सदन में पेश किया। कार्यवाही शुरू होते ही इसे बिना विस्तृत चर्चा के विचार और पारित करने के लिए रखा गया और ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। (Monsoon Session 2026)
इससे पहले सरकार पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक सहित अन्य विधेयकों को भी आगे बढ़ाने में सफल रही। हालांकि विपक्ष के लगातार विरोध के कारण कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी। (Monsoon Session 2026)
विपक्ष का रुख
पहले सप्ताह में विपक्ष का मुख्य फोकस कथित पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन पर रहा। दूसरे सप्ताह में भी कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाए रखा। कई बार नारेबाजी और वेल में आने के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। (Monsoon Session 2026)
पप्पू यादव का भगवा वस्त्र पहनकर प्रदर्शन
इन दो हफ्तों के दौरान सबसे अधिक राजनीतिक और सामाजिक चर्चा निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के संसद परिसर में भगवा वस्त्र धारण कर धरना देने को लेकर हुई। (Monsoon Session 2026)
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है और संसद में विरोध-प्रदर्शन लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। लेकिन इस प्रदर्शन के तरीके को लेकर बहस शुरू हो गई। अयोध्या में हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास और धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई कि भगवा वस्त्र किसी राजनीतिक नाटकीय प्रदर्शन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। संतों ने इसे भगवा की गरिमा से जोड़ते हुए कहा कि यह धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक उपयोग का उदाहरण है। भाजपा के नेताओं ने भी इसी आधार पर पप्पू यादव की आलोचना की। (Monsoon Session 2026)
बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने दो महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े किए हैं। पहला क्या संसद का लगातार हंगामा लोकतांत्रिक विमर्श को कमजोर कर रहा है? दूसरा क्या धार्मिक प्रतीकों, विशेषकर भगवा जैसे आस्था से जुड़े प्रतीकों, का राजनीतिक विरोध में उपयोग किया जाना उचित है? (Monsoon Session 2026)
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मानसून सत्र के पहले दो सप्ताह यह संकेत देते हैं कि राजनीतिक टकराव के बीच भी सरकार अपनी विधायी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वहीं पप्पू यादव के भगवा वस्त्र पहनकर किए गए प्रदर्शन ने केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक विमर्श को भी जन्म दिया है। आगे यह बहस और गहरी हो गई है कि लोकतांत्रिक विरोध की सीमा क्या हो और धार्मिक प्रतीकों के उपयोग के लिए सार्वजनिक जीवन में कौन-सी मर्यादाएँ अपेक्षित हैं। (Monsoon Session 2026)
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