नरेश वत्स
Prime Minister: प्नधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नीट पेपर लीक पर जेन-जी को संबोधित करते हुए अपलोड किए गए पहले सेल्फी वीडियो को मेटा द्वारा हटाया जाना केवल एक ‘तकनीकी खामी’ नहीं, बल्कि भारतीय डिजिटल संप्रभुता में सीधा हस्तक्षेप है। 24 घंटे में 300 मिलियन से अधिक बार देखे गए इस वीडियो को सेंसर करना यह दर्शाता है कि विदेशी सोशल मीडिया कंपनियां किस तरह भारत में नैरेटिव तय करने और लोकतांत्रिक संवाद को दबाने का प्रयास कर रही हैं। 10.5 करोड़ से अधिक इंस्टाग्राम फॉलोअर्स वाले विश्व के सबसे लोकप्रिय नेता की पोस्ट पर रोक लगाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अमेरिकी टेक दिग्गज भारतीय लोकतंत्र को प्रभावित करने का दुस्साहस कर रहे हैं।
प्रायोजित आंदोलन का फर्जीवाड़ा
लेख में उजागर किया गया है कि हालिया ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर जो समर्थन की लहर दिख रही थी, वह पूरी तरह से फर्जी, प्रायोजित और नियंत्रित थी। दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु की तीन व्यावसायिक एजेंसियों ने इन्फ्लुएंसर्स को भारी धन देकर यह फर्जी माहौल बनाया था। भारत को श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल की तरह अस्थिर करने और जलाने के उद्देश्य से विभिन्न विदेशी कड़ियों से वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराए जा रहे थे। इस षड्यंत्र में उस वामपंथी व लिबरल इकोसिस्टम की मदद ली गई जो लंबे समय से भारत विरोधी एजेंडे को हवा देने में जुटा है।
फर्जी खबरों की सुनामी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का जुड़ाव-संचालित एल्गोरिदम तथ्यात्मक जानकारियों के बजाय सनसनीखेज, भ्रामक और नफरत फैलाने वाले कंटेंट को प्राथमिकता देता है। अध्ययनों के अनुसार, फर्जी खबरें सच की तुलना में छह गुना तेजी से फैलती हैं। सीएए विरोध प्रदर्शन, किसान आंदोलन से लेकर जंतर-मंतर पर हालिया हिंसा तक, इन विदेशी प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिदम का इस्तेमाल राष्ट्रवादी आवाजों को दबाने और राष्ट्रविरोधी ताकतों को बढ़ावा देने के लिए किया गया। जब मेटा भारत के प्रधानमंत्री के कंटेंट को सेंसर कर सकता है, तो किसी खास हिंसक या भ्रामक पोस्ट को जानबूझकर वायरल कराना उनके लिए चुटकी बजाने जैसा काम है।
भारत के लिए सख्त ‘रेड लाइन्स’ जरुरी
दुनिया भर के देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और सूचना प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं। चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और हाल ही में ब्राजील जैसे देशों ने अपने कानून और संप्रभुता की रक्षा के लिए विदेशी टेक कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। भारतीय विज्ञापन राजस्व से अरबों डॉलर कमाने वाली इन अमेरिकी कंपनियों को भारत की स्थिरता से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। केंद्र सरकार, जिसने युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए सख्त पेपर लीक कानून पास किया है, उसे अब विदेशी सोशल मीडिया कंपनियों की इस तानाशाही पर भी सख्त ‘रेड लाइन्स’ तय करने की तत्काल आवश्यकता है।
विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में डिजिटल संप्रभुता और विदेशी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मनमानी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नीट (NEET) पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इंस्टाग्राम पर साझा किए गए सेल्फी वीडियो को ‘मेटा’ द्वारा सेंसर किए जाने से देश भर में भारी आक्रोश है। 24 घंटे में 300 मिलियन से अधिक बार देखे गए वीडियो को ‘तकनीकी खामी’ बताकर हटाना केवल एक संयोग नहीं, बल्कि विदेशी टेक कंपनियों द्वारा भारतीय विमर्श को नियंत्रित करने की कोशिश मानी जा रही है। जानिए, कैसे प्रायोजित आंदोलनों, एल्गोरिदम के खेल और विदेशी फंडिंग के बीच अब भारत सरकार को कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
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