चीन से लौटेगी डब्ल्यूएचओ की टीम… लेकिन मिला क्या?

खुद को बेदाग साबित करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने विशेषज्ञों की एक टीम को कोरोना वायरस की उत्पति के बारे में पता लगाने के लिए वुहान भेजा है।

कोरोना वायरस की उत्पति को लेकर शुरू से ही चीन विश्व के अधिकांश देशों के निशाने पर रहा है, लेकिन खुद चीन इसे स्वीकार नहीं करता। चीन के साथ ही डब्ल्यूएचओ भी इस मामले में शक के घेरे में है। अब खुद को बेदाग साबित करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने विशेषज्ञों की एक टीम को कोरोना वायरस की उत्पति के बारे में पता लगाने के लिए   वुहान भेजा है। लेकिन जो जानकारी मिल रही है, उससे लगता नहीं है कि सच्चाई कभी दुनिया के सामने आ पाएगी।

 विशेषज्ञों की टीम कर रही है जांच
डब्ल्यूएचओ के विशेषज्ञों की टीम फिलहाल वुहान में मौजूद है। वह सच को सामने लाने की कोशिश तो कर रही है, लेकिन उसे कोई ठोस सबूत मिलता नहीं दिख रहा है। टीम में शामिल विशेषज्ञ रुस के व्लादिमीर डेडकोव ने सीफुड बाजार का दौरा करने के बाद इस बारे में संदेह जताया। उन्होंने कहा कि वुहान के सीफउड बाजार में कोरोना के फैलने की सभी स्थितियां मौजूद हैं, लेकिन इससे ये नहीं कहा जा सकता कि वायरस की उत्पति यहीं से हुई।

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ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है टीम
बता दें कि वुहान का हुआनन बाजार कोरोना संक्रमण फैलने के बाद 1 जनवरी 2020 को बंद कर दिया गया था। इस बाजार में सब्जियों के साथ ही समुद्री और अलग-अलग प्रकार के मांस बेचे जाते हैं। कोरोना से शुरू में संक्रमित होने वाले लोग भी इस बाजार में काम करते थे। हालांकि वैज्ञानिक अभी भी कोरोना वायरस की उत्पति और प्रसार को लेकर किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।

 कोरोना के प्रसार की सभी स्थितियां मौजूद, लेकिन….
रुसी विशेषज्ञ व्लादिमीर डेडकोव ने इस बाजार का निरीक्षण करने के बाद कहा कि उन्होंने वुहान बाजार देखा और पाया कि बाजार निश्चित रुप से पूरी तरह सही नहीं है, लेकिन यह भी स्पष्ट नहीं है कि कोरोना वायरस वुहान से ही फैला। शायद वायरस दूसरी जगह उत्पन्न हुआ, लेकिन वुहान में कोरोना के प्रसार की सभी स्थितियां मौजूद हैं, इसलिए यहां फैला।

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वुहान इंस्टीट्यूट में सब चीजें व्यवस्थित
डेडकोव ने कहा कि चीन के वुहान स्थित वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ विरोलॉजी में सब चीजें अच्छी तरह से व्यवस्थित हैं और शायद ही इस संस्थान से कुछ लीक होने की कल्पना की जा सकती है। बता दें कि दिसंबर 2019 में कोरोना वायरस का पहला मामला वुहान में ही सामने आया था। इस संक्रमाण की उत्पति स्थल का पता लगाने के लिए डब्ल्यूएचओ की टीम 14 जनवरी से ही चीन के दौरे पर है।

कुछ भी लीक होना मुश्किल
डेडकोव ने कहा कि बेशक हमारे मिशन के लिए केंद्र का दौरा करना, वहां के लोगों से बात करना और यह देखना जरुरी था कि वहां सब कुछ कैसे व्यवस्थित है। मुझे नहीं पता कि किसने इसकी आलोचना की, प्रयोगशाला पूरी तरह से सुसज्जित है। मेरे लिए यह कल्पना करना कठिन है कि यहां से कुछ लीक हो सकता है।

टीम अब तक खाली हाथ
डब्ल्यूएचओ की टीम की इस तरह की बातों से यह स्पष्ट होता है कि कोरोना वायरस की उत्पति के बारे में शायद ही कभी सच सामने आ पाए। ये भी साफ है कि जांच करने पहुंची टीम अब तक खाली हाथ है और उसे ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जिसके आधार पर दुनिया भर के देशों के आरोप झेल रहे चीन की सच्चाई सामने आ पाए।

क्या मिटा दिए गए सबूत?
आशंका जताई जा रही है कि चीन ने डब्ल्यूएचओ के टीम के पहुंचने से पहले सारे सबूत मिटा दिए थे। शक यह भी है कि शुरू से ही कोरोना संक्रमण को लेकर चीन का बचाव कर रहे डब्ल्यूएचओ ने यह टीम मात्र दुनिया को दिखाने के लिए वुहान भेजी हो। हालांकि इस बारे में दावे के साथ कुछ भी कहना मुश्किल है।

टीम को कर दिया था क्वारंटाइन
बता दें कि डब्ल्यूएचओ की जांच करने पहुंची टीम के सदस्यों को चीन ने 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन कर दिया था, जबकि वे वहां जाने से पहले ही कोरोना टेस्ट करा चुके थे। डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों ने इसके लिए चीन की आलोचना भी की थी।

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