उत्तराखंड : फिर शुरू हुआ बचाव कार्य, जानें अब तक कितने लोगों को बचाया गया?

चमोली में आए फ्लैश फ्लड के बाद अब लोगों को जीवित निकालने की कोशिश चल रही है। ग्लैशियर टूटने से ये दुर्घटना हुई है।

चमोली के तपोवन रेनी क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने से जो तबाही मची है उसका राहत कार्य एक बार शुरू हो गया है। रात में नंदादेवी नदी का जलस्तर अचानक बढ़े जाने से राहत कार्य को रोकना पड़ा था। अब तक 15 जीवित लोगों को निकाला गया और 19 शव बरामद किये गए हैं। इस मामले में 202 लोगों के गायब होने की सूचना सरकार की ओर से मिली है।

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के 300 जवान और अधिकारी फिर से राहत और बचाव कार्य में लग गए हैं। ये सभी अब तपोवन बांध की दूसरी सुरंग में फंसे कर्मचारियों तक पहुंचनें और उन्हें निकालने की कोशिश कर रहे हैं।

ये भी पढ़ें – मुंबई : 8 धमाकों से हिल गया मीरा रोड… पढ़ें पूरी खबर

आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक कुमार ने बताया कि लगभग 30 लोग तपोवन की दूसरी सुरंग में फंसे हैं। इसके पहले पहली सुरंग से लगभग 12 लोगों के बचाया गया था। आवश्यकता पड़ी तो अधिक दलों को बुलाया जा सकता है। हम सुरंग में फंसे कर्मचारियों को बाहर निकालने के कार्य को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एसडीआरएफ भी बचाव कार्य मे जुटी
बचाव कार्य के लिए राज्य की एसडीआरएफ का दल भी कार्य कर रहा है। रात में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से बचाव कार्य रोक दिया गया था। जैसे ही मंदाकिनी नदी का जलस्तर कम हुआ बचाव कार्य शुरू हो गया है। इसमें जेसीबी और आधुनिक यंत्रों का उपयोग किया जा रहा है। एसडीआरएफ ने अब तक 8 शवों को बाहर निकाला है।

ये भी पढ़ें – चमोली में ग्लेशियर फटा, 150 लोग लापता!

स्वान दल भी कार्य में लगाया गया
तपोवन क्षेत्र में जहां फ्लैश फ्लड ने तबाही मचाई है वहां स्वान दल को भी लाया गया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में फैले मिट्टी-पानी के दलदल में किसी इन्सान के फंसे होने का पता लगाना और बाहर निकालना है।

ये भी पढ़ें – समुद्र से पीने का पानी बनाने पर कितना आएगा खर्च? … जानिए इस खबर में

तपोवन बांध बह गया
तपोवन बांध को ही ऋषिगंगा परियोजना कहा जाता है। अचानक आई बाढ़ से पूरा बांध ही बह गया है। इसमें दो पुल थे मलारी घाटी और तपोवन में दोनों भी बह गए हैं। जबकि जोशीमठ और तपोवन के बीच की सड़क सुरक्षित है। निर्माणकार्य के लिए बनाए गए झोपड़े क्षतिग्रस्त हुए हैं। नंदादेवी की तलहटी में अभी भी ग्लेशियर का मलबा बिखरा हुआ है। यह मलबा धौली गंगा और अलकनंदा में भी फैल गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here