यूपी मिनी विधानसभा चुनावः भाजपा के हाथ से अयोध्या के बाद काशी,मथुरा भी गया

यूपी में अगले साल होनेवाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कराए गए पंचायत चुनाव को मिनी विधानसभा चुनाव के रुप में देखा जा रहा है। भाजपा को इस बार अयोध्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी और भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भी पराजय का सामना करना पड़ा है।

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव की मतगणना अभी भी जारी है। कई स्थानों पर रिकाउंटिंग का पेंच फंसा दिख रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश में चार चरणों में कराए गए मतदान के बाद 2 मई को मतगणना शुरू की गई। लेकिन अभी तक कई स्थानों पर अलग-अलग कारणों से मतगणना पूरी नहीं हो सकी है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान के पदों के लिए मतदान कराए गए हैं। अब तक जो परिणाम घोषित किए गए हैं, वे भारतीय जनता पार्टी के लिए खतरे की घंटी हैं।

भाजपा को सपा से मिल रही है कड़ी टक्कर
बता दें कि पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के पद पर सभी महत्वपूर्ण पार्टियों ने अपने-अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इनमें से किसी को भी पार्टी का चुनाव चिह्न नहीं दिया गया है। अब तक ज्यादातर नतीजे घोषित किए जा चुके हैं। इनमें भाजपा ने बढ़त बना रखी है, जबकि उसे समाजवादी पार्टी से कड़ी टक्कर मिल रही है। बहुजन समाज पार्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन कांग्रेस सिरे से गायब दिख रही है। चुनाव में निर्दलीय तथा बागी प्रत्याशियों ने भी अपनी ताकत दिखाई है। इनके कारण कई दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा है।

अयोध्या
श्री राम की नगरी अयोध्या में सपा ने जिला पंचायत सदस्य चुनाव में भाजपा को करारी शिकस्त दी है। यहां 40 सीटों में से सपा ने 22 सीटों पर कब्जा कर लिया है। इसके साथ ही सपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट पर भी दावा पेश कर दिया है। भाजपा को यहां कुल आठ सीट मिली है। जबकि चार पर बसपा ने हाथ साफ कर लिया है। इनके साथ ही निर्दलीयों ने छह सीटें जीत ली है।

मथुरा, काशी
अयोध्या के बाद भाजपा को काशी व मथुरा में भी झटका लगा है। अगले साल होनेवाले यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कराए गए इस पंचायत चुनाव को मिनी विधानसभा चुनाव के रुप में देखा जा रहा है। भाजपा को इस बार अयोध्या के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चुनाव क्षेत्र वाराणसी और भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भी पराजय का सामना करना पड़ा है। अयोध्या में समाजवादी पार्टी ने 40 में से 24 सीटों पर जीत हासिल की है। इसके साथ ही बसपा ने भी पांच सीटों को झटक लिया है। भाजपा की झोली में यहां मात्र छह सीटें आई हैं। वाराणसी के जिला पंचायत की 40 सीटों में से सपा के 14 उम्मीदवार विजयी हुए हैं। यहां भाजपा को मात्र आठ सीटों से संतोष करना पड़ा है। मथुरा में बसपा ने 12 उम्मीदवारों के जीतने का दावा किया है। यहां से भाजपा को 9 सीटें मिली हैं।

ये भी पढ़ेंः बंगालः जेपी नड्डा ने पीड़ित परिवारों से की मुलाकात, अब तक 11 से ज्यादा लोगों की मौत

लखनऊ
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसदीय क्षेत्र लखनऊ में जिला पंचायत की 25 सीटों में से सपा को 10, बसपा को चार और भाजपा को मात्र तीन सीट मिली है।

गोरखपुर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मभूमि गोरखपुर की 68 सीटों में से भाजपा को 20 पर जीत मिली है, जबकि सपा ने 19 सीटों पर जीत हासिल की है। यहां से सबसे ज्यादा 21 सीटों पर निर्दलीयों ने बाजी मारी है। इनके साथ ही बसपा को दो और कांग्रेस,आप, निषाद पार्टी को एक-एक सीट मिली है।

ये भी पढ़ेंः पश्चिम बंगाल: हिंसा पर प्रधानमंत्री भी हुए सख्त, जानें राज्यपाल से क्या बोले?

रायबरेली
कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में निर्दलीयों को ज्यादा सीटों पर जीत हासिल हुई है। यहां 52 जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में कुल 708 प्रत्याशियों ने अपनी किस्मत अजमाई थी। इसमें भाजपा, सपा, कांग्रेस व बसपा के अधिकृत प्रत्याशी भी थे। इन सभी के बीच 19 निर्दलीयों ने बाजी मार ली है। सोनिया गांधी के गढ़ में भाजपा अपना असर नहीं दिखा पाई। यहां भाजपा के विधान परिषद सदस्य दिनेश प्रताप सिंह के परिवार का बीते 10 साल से अध्यक्ष पद पर कब्जा था। लेकिन इस बार उनकी यह कुर्सी छीन गई है। निर्दलीयों और भाजपा के बाद यहां सपा और कांग्रेस का दबदबा कायम रहा है।

बागपत
यहां राष्ट्रीय लोकदल का कमाल देखा गया। जिला पंचायत चुनाव में बागपत में राष्ट्रीय लोकदल के प्रत्याशियों ने सत्तासीन भाजपा के साथ ही अन्य दलों को भी चौंका दिया। यहां की 20 सीटों में से लोकदल ने आठ पर जीत हासिल की। भाजपा व सपा को चार-चार सीटों पर जीत मिली है। जबकि बसपा ने केवल खाता खोला है। तीन अन्य सीटों पर निर्दलीयों ने कब्जा जमाया है।

20 प्रत्याशी चुनाव जीत गए लेकिन जिंदगी की जंग हार गए
कोरोना के साए में कराए गए इस पंचायत चुनाव के नतीजों पर भी संक्रमण का असर देखा जा रहा है। प्रदेश के 20 प्रत्याशी ऐसे रहे, जो पंचायत चुनाव तो जीत गए, लेकिन जिंदगी की जंग हार गए। इनमें सबसे चर्चित पांच प्रत्याशी गोरखपुर के और तीन प्रतापगढ़ के हैं। वाराणसी, जौनपुर और अमरोहा के भी 2-2 प्रत्याशी अपनी जीत नहीं देख सके। सिद्धार्थनगर, देवरिया, मिर्जापुर, चंदौली, गाजीपुर और आगरा के एक-एक प्रत्याशी भी ऐसे बदनसीबों में शामिल हैं। इनमें से एक दर्जन से ज्यादा प्रत्याशियों की मौत कोरोना से हुई जबकि चार ने दिल का दौरा पड़ने से दम तोड़ दिया। गोरखपुर में एक प्रत्याशी की हत्या कर दी गई।

पांच लाख का इनामी डकैत का बेटा बना प्रधान
यूपी और एमपी के पाठा क्षेत्र में करीब चार दशक तक डकैत गिरोहों का साम्राज्य हुआ करता था। हर चुनाव में इन डकैतों की हनक रहती थी। वे जिसे चाहते, उसे जीता देते थे, लेकिन पहली बार इन डकैतों के परिजनों ने वोट मांगकर चुनाव जीता। डकैत ददुआ के सबसे खास रहे जेल में बंद राधे का बेटा व मारे गए डकैत ठोकिया के भाई ने प्रधान पद पर कामयाबी हासिल कर ली । ठोकिया कभी इनामी बदमाश रहा था लेकिन आज उसका बेटा पंचायत का प्रधान बन गया है।

कई हस्तियां भी हारीं
मिस इंडिया रनर अप दीक्षा सिंह जौनपुर जिला पंचायत का चुनाव हार गईं, जबकि बलिया में प्रतिपक्ष के नेता रामगोविंद चौधरी के बेटे भी चुनाव हार गए। भाजपा नेता व पूर्व सांसद बब्बन राजभर के भाई लल्लन राजभर भी चुनाव हार गए। पूर्व सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव की भतीजी संख्या यादव भाजपा से टिकट पाकर भी चुनाव नहीं जीत सकीं।

चुनाव की खास बातें

  • पंचायत चुनाव में कुल 12 लाख 89 उम्मीदवार मैदान में उतरे
  • अब तक सभी जिलों को मिलाकर 2,32, 612 ग्राम पंचायत सदस्य, 38,317 प्रधान और 55,926 क्षेत्र पंचायत के सदस्य व 181 जिला पंचायत सदस्य जीत चुके हैं।
  • 826 मतदान केंद्रों पर मतगणना जारी
  • भाजपा की जिला पंचायत सदस्य की 918 सीटों पर जीत, 557 सीटों पर निर्णायक बढ़त

.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here