UPI MDR Framework:भारत में पिछले कुछ वर्षों से यूपीआई (UPI) लेनदेन आम नागरिकों के लिए लगभग पूरी तरह से मुफ़्त रहा है। हालांकि, अब बड़े मर्चेंट भुगतानों के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की घोषणा की गई है। नए नियमों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के ग्राहक-से-व्यापारी (P2M) यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लिया जाएगा। यह स्पष्ट किया गया है कि यह शुल्क ग्राहकों से नहीं वसूला जाएगा, बल्कि यह व्यापारी भुगतान प्रणाली के अंतर्गत लगने वाला शुल्क है।(UPI MDR Framework)
डिजिटल लेनदेन की कमाई का कैसे होगा बंटवारा?
एमडीआर से होने वाली आय का बंटवारा एक निश्चित अनुपात में किया जाएगा। इसके तहत जिस बैंक में ग्राहक का खाता है (इश्यूइंग बैंक), उसे कुल एमडीआर का 40 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। व्यापारी का भुगतान स्वीकार करने वाली अधिग्रहण बैंक (Acquiring Bank) या पेमेंट संस्था को 30 प्रतिशत और यूपीआई ऐप्स (जैसे गूगल पे, फोनपे आदि) को 20 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होगा। शेष 10 प्रतिशत हिस्सा अन्य पेमेंट सेवा प्रदाताओं को दिया जाएगा।(UPI MDR Framework)
ये भी पढ़ेंः Mission 2027: सीएम योगी का सबसे बड़ा कार्ड! जानिए, ‘एक करोड़ महिलाओं’ के लिए क्या है लखटकिया प्लान?
आसान उदाहरण से समझें गणित
इसे एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। यदि कोई ग्राहक किसी दुकान पर यूपीआई के माध्यम से ₹10,000 का भुगतान करता है, तो 0.4 प्रतिशत एमडीआर के हिसाब से ₹40 का शुल्क बनता है। इस ₹40 में से लगभग ₹16 ग्राहक के बैंक को, ₹12 अधिग्रहण संस्था को, ₹8 यूपीआई ऐप को और ₹4 अन्य पेमेंट सेवा साझेदारों को मिलेंगे। यह बंटवारा 40:30:20:10 के तय फॉर्मूले पर आधारित है।(UPI MDR Framework)
छोटे व्यापारियों और आम जनता को बड़ी राहत
यह शुल्क हर यूपीआई लेनदेन पर लागू नहीं होगा। ₹2,000 तक के सभी व्यापारी लेन-देन एमडीआर से पूरी तरह मुक्त रहेंगे। इसके अलावा, व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) यानी आम लोगों के आपस में किए जाने वाले किसी भी राशि के ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। छोटे कारोबारियों को इस दायरे से बाहर रखा गया है, जिससे लगभग 96 प्रतिशत व्यापारियों पर इस बदलाव का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।(UPI MDR Framework)
विशेष क्षेत्रों के लिए अलग दरें और नए मॉडल का प्रभाव
कुछ आवश्यक और विशिष्ट क्षेत्रों के लिए अलग शुल्क संरचना तय की गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि जैसे क्षेत्रों में पात्र बड़े भुगतानों पर ₹5 प्रति लेनदेन का निश्चित शुल्क लगेगा। पूंजी बाजार (Capital Market) के लेन-देन पर एमडीआर 0.02 प्रतिशत तय किया गया है, जबकि सामान्य पात्र भुगतानों के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है। इस नई व्यवस्था से बैंक, ऐप और पेमेंट कंपनियों को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा सुधारने के लिए आवश्यक वित्तीय आधार मिलेगा।(UPI MDR Framework)

