Mumbai Attack: Do Not Forget, Do Not Forgive कार्यक्रम में 26/11 हमले के हुतात्माओं को दी गई श्रद्धांजलि

रविवार को 26/11 आतंकी हमले के 15 साल पूरे हो गए। इस मौके पर 26/11 आतंकी हमले के हुतात्माओं को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार (26 नवंबर) को स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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26/11 मुंबई हमले (26/11 Mumbai Attacks) को लेकर रविवार (26 नवंबर) को स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक (Swatantraveer Savarkar National Memorial) के सभागार में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा जागरूकता मंच (National Security Awareness Forum) और सावरकर स्ट्रैटेजिक सेंटर (Savarkar Strategic Centre) द्वारा आयोजित किया गया था। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय गोविलकर, कैप्टन विक्रमादित्य सिंह, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की कोषाध्यक्ष मंजिरी मराठे, शिवराज्याभिषेक सेवा समिति के अध्यक्ष सुनील पवार और राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के कार्यवाह विनायक काळे मौजूद थे। इस कार्यक्रम का संचालन वकील सुनील कापड़े ने किया।

रविवार को 26/11 आतंकी हमले के 15 साल पूरे हो गए। इस मौके पर 26/11 आतंकी हमले के हुतात्माओं को श्रद्धांजलि देने के लिए रविवार (26 नवंबर) को स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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26/11 जैसे हमलों से बचने के लिए आम लोगों को सतर्क रहना होगा: संजय गोविलकर
जब मुंबई पर आतंकवादियों ने हमला किया तो मैं गिरगांव चौपाटी पर नाकाबंदी पर था। उस वक्त कसाब और इस्माइल आतंकी स्कोडा कार में सवार होकर चौपाटी पर आए। पुलिस फायरिंग में इस्माइल मारा गया, लेकिन जब कसाब सरेंडर करने का नाटक कर रहा था तो उसने अचानक फायरिंग कर दी, कॉन्स्टेबल तुकाराम ओंबले ने उसे जिंदा पकड़ लिया लेकिन उनकी जान चली गई। इसके बाद कसाब को पीटा जाने लगा लेकिन मेरे मन में उसे जिंदा रखने का ख्याल आया, तभी हम सबूतों के साथ ये साबित कर पाए कि ये सभी आतंकवादी पाकिस्तान के थे। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय गोविलकर ने कहा, ये सभी आतंकवादी फिदायीन थे, यानी मरने के लिए आए थे, ऐसे फिदायीन को जिंदा पकड़ना एक बड़ा काम है, इसलिए दुनिया ने हमारी सराहना की। गोविलकर ने यह भी कहा कि आम नागरिकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए और संवेदनशील नागरिक बनने की कोशिश करनी चाहिए, तभी 26/11 जैसे हमले दोबारा नहीं होंगे।

नई पीढ़ी को हिंदू-मुस्लिम नजरिए के अंतर को समझने की जरूरत: मंजिरी मराठे
स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक द्वारा सैन्यकरण की वकालत के कारण भारत को आजादी मिली। भारत को यह आजादी अगर मिली तो हजारों क्रांतिकारियों के बलिदान से मिली। आजादी से पहले सेना में 65 प्रतिशत मुस्लिम थे, जबकि 35 प्रतिशत हिंदू थे। वीर सावरकर ने इस अनुपात को बदल दिया और अनुपात उलट गया और सेना में 65 प्रतिशत हिंदू सैनिक हो गये। इसलिए जब बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सका। क्योंकि, सेना में हिंदू सैनिक अधिक थे, अन्यथा आज भारत का अस्तित्व नहीं होता, ऐसा स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की कोषाध्यक्ष मंजिरी मराठे ने कहा। यही फर्क है हिंदू और मुसलमानों के नजरिए में। हिंदू संस्कृति सिखाती है कि ‘जब आप अच्छे कर्म करते हैं, तो आपको स्वर्ग मिलता है’, जबकि कुरान सिखाता है कि ‘यदि आप काफिरों को मारते हैं, तो आपको स्वर्ग मिलता है’। इसलिए आज की पीढ़ी को हिंदू-मुस्लिम नजरिए का अंतर समझाने की जरूरत है। मंजिरी मराठे ने यह भी कहा कि हमें हिंदू होने पर गर्व होना चाहिए।

नाबालिग आतंकवादियों को कानून का लाभ नहीं मिलना चाहिए: विनायक काळे
मुंबई हमले के दौरान कुछ खामियां थीं, उसके बाद हमने सुरक्षा व्यवस्था में कुछ सुधार किए, लेकिन अभी भी कुछ खामियां हैं। वकील ने तर्क दिया था कि कसाब को अधिनियम के तहत छूट दी जानी चाहिए क्योंकि जब वह जिंदा पकड़ा गया था तब वह नाबालिग था। राष्ट्रीय सुरक्षा जागरण मंच के कार्यवाह विनायक काळे ने कहा, इसलिए अब हमें नाबालिग आरोपियों से संबंधित कानून में संशोधन करने की जरूरत है, ताकि कसाब जैसे नाबालिग आतंकवादियों को पकड़े जाने पर किसी कानून का लाभ न मिले।

राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि: कैप्टन विक्रमादित्य सिंह
7 अक्टूबर को इजराइल पर हमला हुआ, जिसे इजराइल ने युद्ध माना। इस हमले में 270 इजरायली नागरिकों को बंधक बना लिया गया था। कहा जा रहा है कि इसके बाद इजराइल जो कर रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि उनके पास अभी भी लाइसेंस नहीं है। अगर कल को भारत के साथ ऐसा होता है और भारत इजराइल की तरह हमला करता है तो कहा जाएगा कि भारत की हरकतें कितनी दुर्भाग्यपूर्ण हैं, क्योंकि सोशल मीडिया के जरिए ऐसे नैरेटिव बनाए जाते हैं। युद्ध में आम लोगों की जान चली जाती है। कैप्टन विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि देश की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।

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