16 नवंबर तक राहत, पर आगे क्या? बलात्कार प्रकरण में कैलाश विजयवर्गीय की वह याचिका खारिज

कैलाश विजयवर्गीय और संघ के समर्थकों पर पुलिस प्रकरण दर्ज नहीं कर रही थी, जिसमें प्रशासन का मानना था कि प्रकरण राजनीति से प्रेरित है।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के विरुद्ध जांच जारी रहेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने इस आपराधिक प्रकरण में रोक लगाने से इन्कार कर दिया है। इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने कलकत्ता उच्च न्यायालय को अभियुक्तों की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर गुण दोष के आधार पर विचार करने का आदेश दिया है। जिसके बाद 16 नवंबर, 2021 के बाद क्या कैलाश विजयवर्गीय गिरफ्तार होंगे यह सबसे बड़ा प्रश्न है।

यह बलात्कार प्रकरण 2019 का है, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने अभियुक्तों की उस याचिका पर राहत देने से इन्कार कर दिया है, जिसमें जांच पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, इस प्रकरण में तीन अभियुक्त हैं, जिनकी गिरफ्तारी पर 16 नवंबर तक अंतरिम रोक लगा दी है। इस प्रकरण के अभियुक्तों में कैलाश विजयवर्गीय के अलावा प्रदीप जोशी और जिस्नू बसु का नाम है। इस प्रकरण में अगली सुनवाई 16 नवंबर 2021 को है।

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महिला का ऐसा है आरोप
इस प्रकरण में शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया है कि, कैलाश विजयवर्गीय ने उसे अपने फ्लैट में बुलाया था। जहां उसके साथ बलात्कार किया गया। इसके बाद उसे वहां से जाने के लिए मजबूर किया गया। इस घटना के बाद भी भी उसका लगभग 39 बार शारीरिक शोषण किया गया।

इस प्रकरण को लेकर महिला ने 20 दिसंबर, 2019 को आपीसी की धारा 341/506(2)/34 और धारा 341/323/325/506/34 के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करने का आवेदन दिया था, जिस पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद पीड़िता ने 12 नवंबर, 2020 को आईपीसी की धारा 156(3) के अंतर्गत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, अलीपुर के समक्ष आवेदन दायर किया गया, जिसे खारिज कर दिया गया। पीड़ित महिला ने आपराधिक पुनर्विचार आवेदन के अंतर्गत उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण में अलीपुर न्यायालय के आदेश को रद्द करते हुए आपराधिक पुनर्विचार आवेदन पर अनुमति दे दी। अक्टूबर 2021 में उच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप अलीपुर स्थानीय न्यायालय ने महिला की शिकायत को एफआईआर के रूप में स्वीकार करने का निर्देश दिया।

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