अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) और पाकिस्तान (Pakistan) के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) के बीच हाल ही में हुई मुलाकात ने ईरान (Iran) में गहरी नाराजगी और आशंका पैदा कर दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने पाकिस्तान में एक सैन्य अड्डा बनाने की मांग की है, अधिमानतः नूर खान एयरबेस जैसा, ताकि अमेरिकी अभियान इजरायल (Israel) के करीब पहुंच सकें – जो ईरान के लिए एक बड़ी चिंता है।
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उनकी मुलाकात पाकिस्तान को मुश्किल में डाल देगी। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि मुनीर और ट्रंप की मुलाकात से ईरान भड़क गया है और उसने पाकिस्तान को चेतावनी भी दी है। शुक्रवार को प्रेस वार्ता के दौरान मुनीर-ट्रंप के बारे में पूछे जाने पर भारत में ईरान के मिशन के उप प्रमुख मोहम्मद जावेद हुसैनी ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान हमारे साथ खड़ा होगा।”
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ईरान को खतरा
विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक नए रणनीतिक समीकरण के उभरने का संकेत है। अगर पाकिस्तान अमेरिकी सैन्य जरूरतों के लिए सुविधाएं प्रदान करता है, तो ईरान को अपनी पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं पर एक साथ खतरा हो सकता है।
अमेरिका को पाकिस्तान की जरूरत क्यों है?
इस बैठक का समय महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते उच्च-दांव संघर्ष के दौरान हो रही है। पाकिस्तान ईरान के साथ एक भूमि सीमा साझा करता है, और युद्ध में एक अग्रिम पंक्ति के राज्य के रूप में इसका भू-राजनीतिक स्थान अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, खासकर अगर वाशिंगटन संघर्ष में सीधे शामिल होने का फैसला करता है।
ईरानी प्रतिक्रिया
ईरानी विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए बैठक को “शिया-बहुल देशों के खिलाफ एक सुनियोजित कूटनीतिक चाल” कहा। तेहरान का मानना है कि अमेरिका पाकिस्तान की रणनीतिक स्थिति का उपयोग करके इजरायल के साथ मिलकर ईरान को घेरने की योजना बना रहा है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हम ऐसे किसी भी गठबंधन को अस्वीकार करते हैं जो हमारे क्षेत्र में टकराव और विभाजन को बढ़ावा देता है। पाकिस्तान को मुस्लिम एकता के सिद्धांत से विचलित नहीं होना चाहिए।”
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