Hathras Stampede: हाथरस कांड में बड़ा अपडेट, SIT रिपोर्ट के आधार पर SDM-CO समेत छह सस्‍पेंड

हाथरस सत्संग भगदड़ कांड में योगी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन के 6 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हाथरस सत्संग (Hathras Satsang) भगदड़ हादसे (Stampede Accident) के मामले में योगी सरकार (Yogi Government) ने मंगलवार (9 जुलाई) को बड़ी कार्रवाई की है। विशेष जांच दल (Special Investigation Team) की रिपोर्ट के आधार पर योगी सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए सिकंदरमऊ के एसडीएम, सीओ और सिकंदरमऊ के तहसीलदार समेत छह लोगों को निलंबित (Suspended) कर दिया है।बता दें कि 2 जुलाई को हाथरस के पुलराई गांव में भोले बाबा उर्फ ​​सूरजपाल सिंह के सत्संग में भारी भीड़ जुट गई थी। इस दौरान भगदड़ मच गई। सत्संग के दौरान मची भगदड़ में 123 लोगों की मौत हो गई थी।

हादसे के तुरंत बाद एडीजी जोन आगरा और मंडलायुक्त अलीगढ़ के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया और यूपी सरकार ने एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट मांगी थी। एसआईटी ने सौंपी जांच रिपोर्ट मंगलवार को विशेष जांच दल ने 300 पन्नों की जांच रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें प्रशासनिक, पुलिस अफसरों, आम जनता और प्रत्यक्षदर्शियों समेत 125 लोगों के बयान लिए गए हैं।

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रिपोर्ट में नहीं नारायण साकार हरि का नाम
रिपोर्ट के अनुसार, आयोजकों और अफसरों को जिम्मेदार ठहराया गया है। उनकी लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। रिपोर्ट में कहीं भी नारायण साकार हरि उर्फ ​​भोले बाबा का नाम नहीं है।

अधिकारी निलंबित
रावेंद्र कुमार उपजिलाधिकारी सिकंदराराऊ , आनंद कुमार सीओ सिकंदराराऊ, सुशील कुमार तहसीलदार सिकंदराराऊ, आशीष कुमार प्रभारी निरीक्षक थाना सिकंदराराऊ, कचौरा चौकी प्रभारी मनवीर सिंह।

रिपोर्ट में कहा गया है कि उपजिलाधिकारी सिकंदराराऊ ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किए बिना ही कार्यक्रम की अनुमति दे दी थी। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। जांच समिति ने कार्यक्रम आयोजक और तहसील स्तरीय पुलिस व प्रशासन को भी दोषी पाया है। जिन्होंने कार्यक्रम को गंभीरता से नहीं लिया। आयोजकों ने तथ्यों को छिपाकर कार्यक्रम के आयोजन की अनुमति ली थी और कार्यक्रम वाले दिन जब पुलिस निरीक्षण के लिए पहुंची तो उन्हें रोकने का प्रयास किया गया।

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