मंद पड़ा भोंगा… चार जिलों में भी कानून के दायरे में होगी ‘अजान’

मस्जिदों में लगे भोंगे पर होनेवाली अजान के कारण आसपास के लोगों को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। अब इसको लेकर लोगों में एक जागरूकता का निर्माण हो रहा है जिसका परिणाम प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़ और फतेहपुर में दिखने लगा है।

प्रयागराज में मस्जिद के भोंगे की असीमित ध्वनि पर अब कानून का वर्तन करना होगा। इसको लेकर पुलिस ने दिशा-निर्देश जारी कर दिये हैं। जिसके कारण अब ध्वनि निर्धारण और समय निर्धारण दोनों हो गया है। इस बीच आईजी द्वारा आदेश में प्रयागराज के अलावा कौशांबी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ में सख्ती के आदेश दिये गए हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की उपकुलपति संगीता श्रीवास्तव ने इस विषय में एसडीएम को पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने उल्लेख किया था कि उनके घर के पास की मस्जिद प्रतिदिन सुबह-सुबह तेज ध्वनि में अजान होती है। जिसके कारण उन्हें दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इस पर उपकुलपति के विरुद्ध देश में सेक्युलर गैंग ने टिप्पणियां भी शुरू कर दी थीं।

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साच को आंच नहीं
इलाहाबाद विश्वविद्यालय की उपकुलपति द्वारा की गई शिकायत पर पुलिस के आईजी ने संज्ञान में लिया। उन्होंने इस विषय में प्रदूषण नियंत्रण कानून के अंतर्गत उचित कदम उठाने के निर्देश दिये। पुलिस महानिरीक्षक केपी सिंह ने इस विषय में जिलाधिकारी और एसएसपी को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और प्रदूषण नियंत्रण कानून के पालन के निर्देश दिया है। आईजी के आदेश के बाद प्रयागराज के अलावा कौशांबी, फतेहपुर और प्रतापगढ़ में कानून के अनुरूप ही लाउडस्पीकर पर अजान की इजाजत दिये जाने का निर्णय किया गया है। इस बीच काशी विश्वविद्यालय से भी इस प्रकार की शिकायतें मिली हैं।

ये हुआ परिणाम
पुलिस महानिरीक्षक केपी सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की उपकुलपति के पत्र को जिलाधिकारी, डीआईजी और आयुक्त को सौंपी थी। जिसका कारण परिणाम ये हुआ कि मस्जिद प्रबंधन भी हरकत में आ गया।

  • रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक कोई लाउडस्पीकर के उपयोग पर मनाही
  • लाउटस्पीकरों की सख्या 4 से कम करके 2 की गई
  • ध्वनि को कानून के अनुसार नियंत्रित किया गया
  • लाउडस्पीकर की दिशा में किया परिवर्तन

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उच्च न्यायालय का ये है आदेश
15 मई, 2020 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आदेश दिया था कि, अजान इस्लाम का आवश्यक या अभिन्न अंग हो सकता है। लेकिन, लाउडस्पीकर या ध्वनिक्षेपक यंत्रों का उपयोग धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकता। इसलिए किसी भी परिस्थिति में रात 10 बजे से सबेरे 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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