पाकिस्तान में हिंदू प्रताड़ना की यह खबर हिला देगी आपको

पाकिस्तान में हिंदुओं पर अत्याचार कोई नई बात नहीं है। यहां अपहरण, बंधुआ बनाना और धर्मांतरण बड़ी ही सामान्य घटनाएं हैं। अल्पसंख्यकों को ईशनिंदा में सरेआम पीटकर मौत के घाट उतार दिया जाता रहा है। जिसकी सुनवाई न तो पाकिस्तान में है और न ही अतंरराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग उस पर कुछ करता है।

पाकिस्तान के सिंध में हिंदू अब भी बड़ी संख्या में रहते हैं। परंतु, इनकी आर्थिक, सामाजिक परिस्थिति ऐसी है कि मानवता भी शर्मिंदा हो जाए। वर्तमान घटनाक्रम सिंध के उमरकोट की है। जहां दासता में जीनेवाले 55 गुलाम हिंदू परिवार कैद से भाग निकले, उन्हें न्यायालय में ले जाया गया परंतु, अत्याचार से बच नहीं पाए।

यह घटना 31 दिसंबर, 2021 की थी। जब 55 गुलाम जिसमें पुरुष, महिला और छोटे बच्चे भी हैं। उमरकोट के एक बंधक सेंटर से भाग निकले। इसके बाद उन्हें स्थानीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। इन सभी की सुनवाई हुई, और न्यायालय ने उन्हें छोड़ दिया। परंतु, उन पर अत्याचार न्यायालय की दीवारों तक थमा रहा, बाहर आए तो क्रूर इस्लामी गुंडे बंधक बनाने के लिए तैयार खड़े थे।

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इस पूरी घटना का कुछ वीडियो और फोटो पाकिस्तान में कार्य करनेवाले हिंदू संरक्षण दल ने निकालकर वायरल किया है। यहां के अधिकांश हिंदुओं के लिए अब अमानवीय आचरण, गरीबी ही बची है। उसमें दबंग मुस्लिम काश्तकार बड़ी संख्या में गरीब हिंदुओं को मार पीटकर अपना बंधक बनाकर रखते हैं। उनकी महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ ज्यादतियां सामान्य घटना है, जिसकी सुनवाई कहीं नहीं है।

शिव मंदिर और उमरकोट किले के लिए प्रसिद्ध
उमरकोट का पुराना नाम अमरकोट था। जो प्राचीन शिव मंदिर और ठाकुर राजशाही के लिए प्रसिद्ध था। यहां के हिंदू राजा राणा प्रसाद ने अपने किले में हुमायूं को शरण दी थी, जहां अकबर का जन्म हुआ। उमरकोट भारतीय सीमा से मात्र 60 किलोमीटर दूर है। यह क्षेत्र हिंदू बहुल रहा है। 2017 की जनगणना में सिंध प्रांत के उमरकोट जिले में 52 प्रतिशत हिंदू जनसंख्या सामने आई। इस जिले में ठाकुरों के अलावा भील, कोली और मेघवार जाति के हिंदु रहते हैं।

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