महाराष्ट्र : ये बंद सरकारी है! ये हैं साक्ष्य

महाराष्ट्र में सरकार चला रही तीन पार्टियों ने बंद किया। इस दौरान कई स्थानों पर छिटपुट हिंसक घटनाएं भी हुई। यह बंद पूरी तरह से सरकार प्रायोजित था, विपक्ष का यह आरोप कुछ बिंदुओं पर सही लगता है।

बस सेवा पूर्णत: बंद – सोमवार 11 अक्टूबर, 2021 को महाराष्ट्र में बंद पुकारा गया था। इसके पहले रविवार रात को ही बेस्ट की बसों में डेपो के आसपास तोड़फोड़ हो गई। इसमें 8 बसें क्षतिग्रस्त हुई थीं। बस सेवा शुरू रखने के लिए सुरक्षा का मुद्दा उठा। इसके अलावा बेस्ट सेवा में शिवसेना, कांग्रेस आदि पार्टियों की यूनियनों ने बंद का समर्थन किया। जिसके कारण कभी न बंद पड़नेवाले बेस्ट के पहिये सरकार में शामिल दलों को अपरोक्ष समर्थन देते हुए बंद हो गए। इस बंद में शामिल कर्मियों पर मेस्मा के अंतर्गत कार्रवाई होनी चाहिए, परंतु इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया। बस सेवाओं के थमने से सामान्य जनों को दिक्कत का सामना करना पड़ा।

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भोजन को तरसे लोग – लॉकडाउन के काल में भी लोगों को भोजन मिल पाए इसलिए होटल, सड़क पर चलनेवाले चाय-वड़ा पाव के ठेलों पर पार्सल की अनुमति दी गई थी। परंतु, सरकारी पार्टियों के सोमवार के बंद में न सिर्फ स्वीगी, जोमैटो की पार्सल सेवा बंद रही, बल्कि होटलों पर भी ताला था। आरोप है कि, ऐसा शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी द्वारा होटल यूनियनों पर दबाव बनाकर कराया गया था।

दुकानें बंद कराई गई – सरकार के सामने कौन सुर उठाए। रिटेलर्स अशोशिएशन ने सामूहिक रूप से सरकार में शामिल दलों की मांग को मानते हुए सोमवार को अपनी दुकानें बंद रखने का निर्णय लिया था। अब तक सरकार दुकानें खुलवाने के लिए रिटेलर्स असोशिएशन से बात करती थी, परंतु इस बार यह उल्टा हो गया। इस बार सरकारी पक्ष ही बंद करने के लिए दबाव बनाती दिखी।

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