मुंबई लोकल के यात्री बन गए कोरोना सुपर स्प्रेडर! जानिए कैसे?

एक अनुमान के तहत मुंबई की तीनों रेलवे लाइनों पर इन दिनों हर दिन करीब 35 लाख लोग यात्रा कर रहे हैं। इस कारण पिक ऑवर्स में सुबह-शाम काफी भीड़ देखी जा रही है।

मुंबई लोकल ट्रेन देश की सबसे सस्ती और सुविधाजनक यात्रा का साधन मानी जाती है। इसके महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि इसे मुबंई की लाइफलाइन कहा जाता है। इसलिए लोग हर हाल में यात्रा के लिए लोकल ट्रेन का उपयोग करने की कोशिश करते हैं। वर्तमान में कोरोना की दूसरी लहर के चलते एक बार फिर इसमें केवल अत्यावश्यक सेवा के लिए यात्रा करने की अनुमति दी गई है। सामान्य मुंबईकरों को इसमें सफर करने पर रोक लगा दी गई है और पकड़े जाने पर उन पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं हैं। इसका प्रमाण हर दिन मुंबई की तीनों रेलवे लाइनों वेस्टर्न, सेंट्रल और हार्बर की लोकल में यात्रा करने वाले यात्रियों की बड़ी संख्या है।

एक अनुमान के तहत मुंबई की तीनों रेलवे लाइनों पर इन दिनों हर दिन करीब 35 लाख लोग यात्रा कर रहे हैं। इस कारण पिक ऑवर्स में सुबह-शाम काफी भीड़ देखी जा रही है। माना जा रहा है कि इसके चलते मुंबई में कोरोना तेजी से फैल रहा है।

आम यात्रियों ने लगाया जुगाड़
दरअस्ल सरकार और रेलवे की कोरोना की पहली लहर के दौरान तमाम तरह की पाबंदियों के समय से ही लोगों ने जुगाड़ लगाना शुरू कर दिया था। उन्होंने अत्यावश्यक सेवा जैसे चिकित्सा, बैंकिंग और अन्य तरह की सेवाओं के फर्जी कार्ड बनवाकर पहले से ही यात्रा करना शुरू कर दिया था। कई बार रेलवे पुलिस ने फर्जी आई कार्ड पर यात्रा करनेवाले यात्रियों के साथ ही फर्जी कार्ड बनाने के रैकेट चलाने वाले लोगों को भी गिरफ्तार किया था, लेकिन सूत्र बताते हैं कि ऐसे पकड़े गए लोगों की संख्या काफी कम थी, उससे कई गुना अधिक लोग फर्जी कार्ड बनाकर लोकल में आराम से यात्रा कर रहे थे।

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ये है सच्चाई
दरअस्ल कहने को तो रेलवे में फर्जी आई कार्ड पर यात्रा करते पकड़े जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है। मुंबई के एक रेलवे स्टेशन मास्टर ने नाम न छापने की शर्त पर इस बारे में रहस्योद्घाटन करते हुए बताया कि टिकट चेकर और पुलिस खुद ही फर्जी आईडी वाले लोगों को पकड़कर टेंशन नहीं लेना चाहते। पकड़े जाने पर ऐसे यात्रियों द्वारा जुर्माना भरने में बेबस बताए जाने पर उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ती है। कागजी कार्रवाई के साथ ही उनके कोर्ट में पेश करने तक के प्रावधान काफी लंबे होने से वे खुद ही इस तरह के टेंशन से बचना चाहते हैं। इसलिए वे यात्रियों के आई कार्ड पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और अगर उनके पास टिकट या पास है तथा अत्यावश्यक सेवा का कोई भी आई कार्ड है तो ऐसे यात्रियों को वे पकड़कर टेंशन नही लेना चाहते। इसका दूसरा कारण यह भी है कि टिकट चेकर और रेलवे पुलिस खुद ही कोरोना संक्रमण से डरे हुए रहते हैं और वे दूर से ही टिकट, पास और आई कार्ड देखकर यात्री को जाने देते हैं।

लोकल में भीड़
 मुंबई लोकेल के लिए टिकट काटनेवाले एक कर्मचारी ने भी माना कि बड़ी संख्या में लोग फर्जी आई कार्ड से लोकल में यात्रा कर रहे हैं। उसने बताया कि सुबह मुझे काफी भीड़ में अपना स्टेशन जाना पड़ता है। उसने बताया कि हम केवल आईडी देखकर टिकट या पास दे देते हैं। इसके लिए हम ज्यादा तीन-पांच नहीं करते। कई बार तो वे खुद भी बता देते हैं कि मैं फर्जी आईडी पर यात्रा करने को मजबूर हूं।

अधिकारियों को चिंता नहीं
टिकट काउंटर कर्मचारी ने यह भी बताया कि शुरुआत में हम कड़ाई करते थे, तब हम अपने अधिकारी से पूछते थे तो उनका जवाब होता था, ‘यात्री के पास आईडी है ना.. अगर है तो टिकट दे दो। आईडी चेक करना तुम्हारा काम नहीं है।’ इसलिए हम भी टेंशन नहीं लेते और केवल आईडी देखकर हम टिकट या पास दे देते हैं। इसका एक कारण यह भी है कि कई बार यात्री झगड़ा करने पर उतारु हो जाते हैं। इस तरह के तनाव लेने से बेहतर हम यही समझते हैं कि अगर अत्यावश्क सेवा का आई कार्ड है, तो यात्री को टिकट या पास दे दो। इस हालत में लोकल ट्रेनों में सामान्य यात्रियों की यात्रा पर रोक होने के बावजूद ट्रेनों में भीड़ देखी जा रही है। इस कारण मुंबई में कोरोना संक्रमण बढ़ने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

भीड़ के साथ बढ़ने लगा कोरोना संक्रमण
बता दें कि जब से सामान्य लोगों के लिए लोकल में यात्रा करने की मंजूरी मिली है, तब से लोकल में बढ़ती भीड़ के साथ ही कोरोना संक्रमण की रफ्तार भी तेजी से बढ़ने लगी है।
फिलहाल आम लोगों के लिए एक बार फिर लोकल में यात्रा करने पर रोक लगाने की घोषण तो कर दी गई है लेकिन लोग जुगाड़ लगाकर यात्रा कर भीड़ के साथ कोरोना भी बढ़ा रहे हैं।

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