चीन से खतरा कम नहीं, 2050 तक बढ़ सकते हैं हमले? पढ़िये वीर सावरकर स्ट्रेटेजिक सेंटर के ब्रि.(रि) हेमंत महाजन से ले.ज (रि) पीजेएस पन्नू की चर्चा

विश्व में चीन अपने विकास बल पर अमेरिका जैसी शक्ति को पछाड़ने के प्रयत्न में है। इसके पीछे उसका तकनीकी विकास, नागरिकों का मनोबल है, विश्व के कोने-कोने में फैले उसके नागरिकों का कार्य देश के लिए जासूसी का भी है। आनेवाले वर्षों में विश्व को चीन से कोरोना जैसे खतरों का सामना अधिक करना पड़ सकता है।

नॉन काइनेटिक और नॉन कॉन्टेक्ट वॉरफेयर में भारतीय रक्षा उद्योग का विकास, उन्नत तकनीकी और शोध ही देश की क्षमता बढ़ाएगी। हम विश्व के शीर्ष तीन देशों में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर सकते हैं लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि हम तकनीकी विकास, शोध पर अपने बजट को बढ़ाएं। वर्तमान की आवश्यकता है मिलिटरी 4.5 के अंतर्गत विकास।चीन अपने आपको अमेरिका से बड़ा वर्ल्ड पॉवर बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

भारत की वर्तमान शक्ति और चीन से उसके तुलनात्मक अध्ययन पर दूर दृष्टि के माध्यम से चर्चा का आयोजन स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक स्ट्रेटेजिक सेंटर के हेमंत महाजन के नेतृत्व में संपन्न हुआ। इसमें भारतीय सेना की स्थिति और चीन से खतरे से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर लेफ्टिनेन्ट जनरल पीजेएस पन्नू ने अपने दृष्टांत रखे।

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चीन के साथ भारत पिछले दो वर्षों से लद्दाख में डटा हुआ है। इसके पीछे के कारणों पर हुई चर्चा में एक विशेष बात सामने निकल आई कि, यह है नॉन काइनेटिक, नॉन कॉन्टेक्ट, इन्फोर्मेशन वॉरफेयर, प्रोपोगेंडा वॉरफेयर और हैकिंग माइन्ड का उपयोग चीन पूर्ण रूप से कर रहा है।

नॉन काइनेटिक वारफेयर और नॉन कॉन्टेक्ट वारफेयर…
चीन नॉन काइनेटिक वारफेयर की दिशा में अपने आपको उन्नत कर रहा है। यह साइबर अटैक, जानकारियां प्राप्त करना, राजनीतिक रूप से देश को पंगु बना देना है। एक तरह से ये इन्फोर्मेशन वॉर है। इसके अलावा नॉन कॉन्टेक्ट वॉरफेयर है, जिसमें दुश्मन देश की सेना को उनकी भूमि में ही पराजित करना शामिल होता है। यहां चर्चा चीन के संदर्भ में हो रही है लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण उदाहरण है रूसी मिलिटरी अनालिस्ट मेजर जनरल व्लादिमीर स्लिपचेन्को का, उन्होंने कहा था कि यह छठे चरण का युद्ध कौशल है। जिसमें दुश्मन को उसके ही देश में पराजित करना, उसकी अर्थ व्यवस्था को धराशायी करना, विशेषताओं को दुस्वारियों में बदल देना होता है।

प्रोपोगेंडा वॉरफेयर… चीन की ओर से इसका भी बहुत उपयोग किया जाता रहा है। ब्रिगेडियर हेमंत महाजन ने बताया कि चीन लद्दाख में चल रहे गतिरोध के काल में भारतीय मीडिया के माध्यम से इसका उपयोग करता रहा है। उसकी ओर से प्रचारित किया जाता रहा कि इस लोकेशन पर इतने हजार टैंक पहुंच गए, इतनी सेना वहां पर तैनात है, कैंप बना लिये गए आदि-आदि… इसके अलावा अपनी सेना के बारे में यह प्रचारित करना कि माइक्रवेव हथियारों का उपयोग करके चीनियों ने लद्दाख में भारतीय टुकड़ियों पर हमला किया। यह उसी स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। यह दावा रेनमिन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के एसोसिएट डीन ने अगस्त 2019 में किया था।

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इस चर्चा में हैकिंग दी माइन्ड वायफेयर पर भी चर्चा हुई। इसमें प्रश्नों में ही ब्रिगेडियर हेमंत महाजन ने रुसी राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बेचेव, पेरेस्ट्रोइका का उल्लेख किया। इस विषय में बोलेत हुए लेफ्टिनेन्ट जनरल पीजेएस पन्नू ने कहा कि, कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर जब विश्व चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को निशाना बना रही थी तो उनके अपने देश के नागरिकों ने राष्ट्रपति के मनोबल को बनाए रखा। सेना ने सीमाओं से गतिविधियों के माध्यम से देश की दृढ़ता और मजबूती का परचय दिया। यह सब शी जिनपिंग के लिए मनोबल बढ़ानेवाला कदम था। जो हैकिंग दी माइन्ड का सकारात्मक रूप है। लेकिन इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि जब कुछ न होते हुए पहाड़ बनाया जाता है तो वो जल्दी ही ध्वस्त भी हो जाता है।

चीन का युद्ध अभी खत्म नहीं
लेफ्टिनेन्ट जनरल पीजेएस पन्नू ने कहा कि कोरोना के माध्यम से जो कार्य चीन ने किया है वो अभी खत्म नहीं हुआ है। चीन अमेरिका को चुनौती दे रहा है। अब अमेरिका विश्व में संसाधन विकास, शोध प्रणाली में एकछत्र राज कर रहा था। लेकिन, 2050 तक चीन अपने आपको उससे अधिक शक्तिशाली बनाकर उसे पीछे करने के प्रयत्न में है। इसके लिए वह अभी कोरोना जैसे अन्य माध्यमों का उपयोग करेगा।

तकनीकी पर चीन की पकड़
चीन की सेना के विकास पर ब्रिगेडियर महाजन द्वारा पूछे गए प्रश्न पर लेफ्टिनेन्ट जनरल पीजेएस पन्नू ने बताया कि चीन ने रक्षा प्रणाली, सूचना क्रांति, अर्थ ऑब्जर्वेशन सिस्टम पर बहुत कार्य किया है। इसके कारण चीन को पूरे विश्व की रियल टाइम पिक्चर मिलती रहती है। उसने सर्वेलांस पर बहुत खर्च किया और स्वदेशी प्रणाली का विकास किया। आज उसके पास सीमाओं की एक-एक गतिविधि पर दृष्टि रखने की क्षमता है। जो उसे सतत पल-पल की ग्राऊण्ड इन्फोर्मेशन देती रहती है। यह सब उसने तब विकसित किया जब वह युद्ध में नहीं था। चीन के पास अमेरिका के टेलीस्कोप से भी बेहतर तकनीकी है। जो उसे जियो स्पेशल डेटा प्रदान कर रहा है। उसने अपनी सेनाओं को आर्टिफिशियली जनरेटेड एक्ट के माध्यम से फ्लड, रेन, फॉग को कवर करने के लिए क्षमता प्रदान कर दी है।

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भारतीय शक्ति का आंकलन
ब्रिगेडियर हेमंत महाजन ने भारतीय तकनीकी और युद्ध संसाधन विकास के बारे में भी प्रश्न पूछे। जिसके उत्तर में लेफ्टिनेन्ट जनरल पीजेएस पन्नू ने बताया कि डीआरडीओ और इसरो आज साथ में हैं। मिशन शक्ति में हमने सैटेलाइट तोड़ी, स्पेस के क्षेत्र में हमने अच्छा किया, हमें इस तकीनीकी में तेजी से आगे बढ़ना है। मिलिट्री 4.5 पर कार्य करना है।
चीन क्वांटम टेक्नोलॉजी पर काम करता है, जिसे ब्रेक करना कठिन है, हमें अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकी में व्यापक उन्नति करनी होगी। 5 जी तकनीकी पर कार्य हो रहा है। यह तकनीकी आपको पूरी तरह नियंत्रित कर लेगी, 5 जी का उपयोग करके चीन जैसे देश आपकी सभी जानकारियों को पढ़ेंगे, नागरिकों और सेना को हतोत्साहित करेंगे। इसलिए आवश्यक है हम रक्षा उद्योग में खर्च करें, तकनीकी विकास में खर्च करें। अपनी चिप का निर्माण करें। जिससे सेना को स्वदेशी तकनीकी पर आधारित युद्ध संसाधन प्राप्त होंगे।

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