Politics: इंडी गठबंधन के लिए नीतीश कुमार के दिल में क्या है? राजनीतिक गलियारों में नायक और खलनायक की चर्चा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी एकता को एकजुट करने की मुहिम पटना से शुरू की थी। इसके सूत्रधार नीतीश कुमार बने थे

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बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) को समझना राजनीतिक (Political) पंडितों के लिए मुश्किल है… अपने राजनीतिक करियर (Political Career) में सत्ता के लिए पाला बदलना उनकी आदत में शुमार हो गया है। सत्ता में बने रहने के लिए किसको कब पटखनी देनी है। ये बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खूब जानते है। उनके ताजा रूख से उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) झारखंड (Jharkhand) में रैली करने की योजना से इंडी गठबंधन (Indi Alliance) के सहयोगी दलों में असमंजस की स्थिति बन रही है। (Politics)

नीतीश कुमार का यूपी प्लान
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में पीएम मोदी के खिलाफ विपक्षी एकता को एकजुट करने की मुहिम पटना से शुरू की थी। इसके सूत्रधार नीतीश कुमार बने थे। लेकिन धीरे-धीरे इंडी गठबंधन में सहयोगी दलों के बीच दरारे पड़नी शुरू हो गई। हाल ही में हुए पांच राज्यों के चुनावों में मध्यप्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच लड़ाई जगजाहिर है। लेकिन अब नीतीश कुमार ने यूपी में अपनी सक्रियता बढ़ाने के संकेत दे दिए है। नीतीश कुमार की 24 दिसंबर को होने वाली अपनी वाराणसी की रैली को टाल दिया है। अगले साल जनवरी महीने में झारखंड की रैली के बाद यूपी के पूर्वांचल में रैली करेंगे।

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यूपी के पूर्वांचल में राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश
यूपी के पूर्वांचल की राजनीति अपना दल के संस्थापक अध्यक्ष सोने लाल पटेल के इर्द गिर्द घूमती रही है। सोने लाल की बेटी अनुप्रिया पटेल मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री है। उनका कुर्मी वोटों पर प्रभाव है। अनुप्रिया पटेल की मां कृष्णा पटेल ने अपनी पार्टी अपना दल कमेरावादी बना रखी है। नीतीश कुमार कुर्मी जाति से ताल्लुक रखते है। पूर्वांचल के कई जिलों चंदौली, बनारस, बलिया, सिद्धार्थनगर आदि जिलों में बिहार के साथ रोटी -बेटी का रिश्ता है। नीतीश कुमार इसी जातीय समीकरण को अपनी राष्टीय राजनीति के लिए इस्तेमाल करना चाहते है। समाजवादी पार्टी भी यूपी में 65 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। ऐसे में समाजवादी पार्टी को नीतीश कुमार का ये अंदाज खल रहा है। समाजवादी पार्टी के लिए नीतीश कुमार चिंता का सबब बन गए है।

कांग्रेस, सपा और नीतीश कुमार की राहे जुदा
पीएम मोदी से लड़ते-लड़ते नीतीश कुमार कांग्रेस, समाजवादी पार्टी से ही लड़ने लगे है। कांग्रेस विपक्ष का नेतृत्व करने के सपने सजाए बैठी है। समाजवादी पार्टी अपने वोट बैंक को कांग्रेस और नीतीश की पार्टी जेडीयू को छूने नहीं देना चाहती। इंडी गठबंधन के लिए एक अनार, सौ बीमार की कहावत सटीक बैठती है।

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