परप्रांतीय की शरण में उबाठा! जानिये, तेजस्वी यादव और आदित्य ठाकरे की मुलाकात का क्या है मायने

आदित्य ठाकरे की राहुल गांधी से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव से मुलाकात को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है ।

महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की शिवसेना या उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी राष्टीय परिदृश्य में अपनी नई भूमिका तलाशने में जुट गई है। इसलिए अब परप्रांतीय के प्रति उसका रूख नरम हो गया है। यही नहीं, पार्टी अब उत्तर प्रदेश और बिहार जाकर अपनी जमीन भी तलाशने लगी है। इसी उद्देश्य से पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे पटना पहुंच गए। ठाकरे परिवार का कोई सदस्य पहली बार बिहार पहुंचा है। इसलिए समझना मुश्किल नहीं है कि इस मुलाकात का क्या उद्देश्य हो सकता है। आदित्य ठाकरे ने मुलाकात के बाद कहा कि कि आज तेजस्वी यादव से अलग-अलग विषयों पर बातचीत हुई। देश का युवा महंगाई, रोजगार और संविधान के लिए काम करना चाहता है । अगर हम आपस में बातचीत करते रहें तो देश में कुछ अच्छा काम हो सकेगा।

लोकतंत्र और संविधान को बचाने की चुनौती
तेजस्वी यादव ने कहा कि अभी देश में लोकतंत्र और संविधान को बचाने की चुनौती हमारे सामने है। इसे बचाने के लिए हमसे जो बनेगा, वो हम करेंगे।

तेजस्वी यादव और आदित्य ठाकरे की मुलाकात का अर्थ
बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के साथ आदित्य ठाकरे की मुलाकात के कई मायने हैं। समझा जा रहा है कि शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट 2024 लोकसभा चुनाव से पहले नये गठबंधन पर संभावना तलाश रही है । एनडीए के खिलाफ गैर बीजेपी दलों को एकजुट करने की कोशिश नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव कर रहे हैं । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई दलों से बात कर चुके है ।

 भारत जोड़ो यात्रा में भी शामिल हो चुके हैं आदित्य ठाकरे
आदित्य ठाकरे की राहुल गांधी से मुलाकात के बाद तेजस्वी यादव से मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह पहला अवसर है, जब ठाकरे परिवार का कोई सदस्य लालू यादव के परिवार से बिहार आकर मिल रहा है। आदित्य ठाकरे के साथ शिवसेना के उपनेता अनिल देसाई और सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी तेजस्वी से मुलाकात की।

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