ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने उपराष्ट्रपति उम्मीदवार (Vice Presidential Candidate) के लिए किसी को तमिलनाडु (Tamil Nadu) से नहीं होना चाहिए और वह व्यक्ति राजनीतिक नहीं होना चाहिए। ममता बनर्जी ने ये शर्त कांग्रेस (Congress) के सामने रख दी है। ममता बनर्जी ने साफ कर दिया कि इसका उद्देश्य इस चुनाव को सिर्फ राजनीतिक शक्ति की टक्कर न बनाकर, संविधान-संगीनता और “आइडिया ऑफ इंडिया” की रक्षा का रूप देना है।
क्या यह कांग्रेस को चुनौती है?
राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि ये बिल्कुल स्पष्ट है कि तृणमूल कांग्रेस इस तरह के सुझावों से कांग्रेस मुक्त भारत की विचारधारा को भी बढ़ावा दे रही है। तृणमूल कांग्रेस ने मांग की है कि उपराष्टपति पद का उम्मीदवार तमिलनाडु से न हो और नॉन-पॉलिटिकल हो ये साफतौर पर इंडी गठबंधन में संघर्ष और नेतृत्व को लेकर बढ़ते तनाव का संकेत देती है। कांग्रेस इस गठबंधन की मुख्य चेहरा रही है, लेकिन तृणमूल कांग्रेस इस गठबंधन में खुद की पहचान और अलग नेतृत्व की संभावना भी तलाश रही है।
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जैसा कि विदित है उपराष्ट्रपति चुनाव (2022) में भी तृणमूल कांग्रेस ने खुद को स्वतंत्र रखा था, कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा बिना परामर्श घोषित किए जाने पर ने तृणमूल कांग्रेस ने मतदान से बाहर रहने का विकल्प चुना था।
यह एक स्पष्ट राजनीतिक संकेत है कि ममता बनर्जी कांग्रेस के प्रभाव से थोड़ा अलग सोच और रणनीति पेश करना चाहती है। यह सिर्फ चुनाव तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इंडी गठबंधन में ममता बनर्जी की शक्ति और दबदबे का इशारा भी है।
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