Election 2023: अंतिम नतीजों पर टिका जाति जनगणना का भविष्य

जाति आधारित जनगणना के बारे में जनता क्या सोच रही है? इसका जवाब तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनाव नतीजों से सामने आएगा। क्योंकि हिंदी भाषी राज्यों में जाति की राजनीति सबसे बड़ा हथियार है और तीनों ही राज्यों में पिछड़ी जातियां आधे से ज्यादा वोटर हैं।

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वन्दना बर्वे
ओबीसी मतदाताओं को भारतीय जनता पार्टी से अलग करने के लिए कांग्रेस ने जो जातीय जनगणना (caste census) का दांव खेला है, उसकी पहली परीक्षा पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव 2023 ((Election 2023) ) में होगी। तीन मुख्य हिंदी भाषी राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में राहुल गांधी की जाति जनगणना योजना क्या करिश्मा दिखाती है? इस पर सभी का ध्यान है।

चुनाव नतीजों से तय होगी कई मुद्दों की दिशा
चुनाव आयोग ने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव (assembly elections) की घोषणा कर दी है जिसे 2024 के लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा । इस चुनाव में सिर्फ हार-जीत ही तय नहीं होगी, बल्कि जातीय जनगणना, महिला आरक्षण आदि मुद्दों को लेकर लोगों के मन में क्या चल रहा है? यह भी स्पष्ट हो जायेगा।

मोदी की काट की जद्दोजहद
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वादा किया है कि अगर देश में कांग्रेस (Congress) की सरकार आई तो राष्ट्रीय स्तर पर जातिवार जनगणना कराई जाएगी। मूलतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के नाम पर देश का ओबीसी समुदाय भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर शिफ्ट हो गया है। इससे कांग्रेस के पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई है और राहुल गांधी ने ओबीसी की काट के रूप में जातिवार जनगणना का मुद्दा उठाया है। अब ये मुद्दा कांग्रेस के लिए कितना फायदेमंद है, यह विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह स्पष्ट हो जायेगा।

हिंदी भाषी राज्यों में जाति की राजनीति
जाति आधारित जनगणना के बारे में जनता क्या सोच रही है? इसका जवाब तीन राज्यों राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनाव नतीजों से सामने आएगा। क्योंकि हिंदी भाषी राज्यों में जाति की राजनीति सबसे बड़ा हथियार है और तीनों ही राज्यों में पिछड़ी जातियां आधे से ज्यादा वोटर हैं। यह नहीं भुलाया जा सकता कि सत्ता की चाबी मतदाताओं के हाथ में है।

सत्ता पलट का इतिहास
राजस्थान में 1993 के बाद से हर पांच साल में सत्तापलट का इतिहास रहा है। अगर यह कसौटी लागू होती है तो यह मान लेना होगा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार चली जाएगी। जाति आधारित जनगणना का मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति पर क्या असर पड़ा? ये भी देखा जाएगा।

विपक्ष की जाति बनाम भाजपा का हिंदुत्व
मूल रूप से, जाति आधारित जनगणना का हथकंडा कांग्रेस ने ओबीसी मतदाताओं को भाजपा की ओर जाने से रोकने के लिए खेला है। लेकिन ओबीसी समुदाय का नेतृत्व खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते हैं। इसके अलावा, विपक्ष की जाति आधारित राजनीति पर अंकुश लगाने के लिए हिंदुत्व भी भाजपा के साथ जुड़ गया है।

सत्ता विरोधी लहर की आस
छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े समुदाय साहू, कुर्मी और यादव कांग्रेस के पक्ष में खड़े थे। इसके चलते कांग्रेस सत्ता में आई और रमन सिंह की सरकार चली गई। अब बीजेपी को लगता है कि सत्ता विरोधी लहर का फायदा उसे मिलेगा।
राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने ‘जीतो या मरो’ वाली स्थिति है। क्योंकि, यहां हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का इतिहास रहा है।

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