क्रिप्टो करेंसी है क्या? कैसे किया जाता है इससे लेनदेन? जानिये, इस खबर में

क्रिप्टो करेंसी यानी आभासी मुद्रा की अवधारणा लगभग एक दशक पुरानी है। वर्चुअल करेंसी, या क्रिप्टो करेंसी, कंप्यूटर एल्गोरिथम पर आधारित करेंसी है।

केंद्र की मोदी सरकार 29 नवंबर से शुरू हो रहे शीतकालीन सत्र में क्रिप्टो करेंसी को लेकर बिल पेश करेगी। उस बिल के पास होते ही देश में अधिकांश निजी क्रिप्टो करेंसी पर बैन लग जाएगा।

सरकार कुछ को छोड़कर सभी क्रिप्टो करेंसी पर प्रतिबंध लगाकर इसके लेनदेन को नियंत्रित और सुरक्षित बनाना चाहती है। उसके इस निर्णय के बाद इस करेंसी से जुड़ी खबरें सुर्खियों में हैं।

ये भी पढ़ेंः केंद्र सरकार के इस निर्णय से क्रिप्टो करेंसी मार्केट में हड़कंप! ये हैं, इसकी 10 खास बातें

क्रिप्टो करेंसी क्या है? इसका इतिहास क्या है? इससे लेनदेन कैसे होता है, ये सब हम यहां जानते हैं

  • क्रिप्टो करेंसी यानी आभासी मुद्रा की अवधारणा लगभग एक दशक पुरानी है। इसलिए ज्यादातर लोग जानते हैं कि क्रिप्टो करेंसी क्या होती है। वर्चुअल करेंसी, या क्रिप्टो करेंसी, कंप्यूटर एल्गोरिथम पर आधारित करेंसी है। इस मुद्रा का कोई भौतिक यानी फिजिकल रूप नहीं है। हालांकि, आप इसका उपयोग वित्तीय लेनदेन के लिए कर सकते हैं।
  • बिटकॉइन की अवधारणा की शुरुआत 2009 में सातोशी नाकामोटो नामक एक इंजीनियर ने किया था। एक कंप्यूटर प्रोग्राम में गणितीय गणना करके ‘बिटकॉइन’ अस्तित्व में आया। पिछले एक दशक में, कंप्यूटर की दुनिया में सैकड़ों क्रिप्टो करेंसी उभरी हैं।
  • इस प्रकार की आभासी मुद्रा से किए गए वित्तीय लेनदेन अत्यधिक गोपनीय होते हैं। इस तरह के लेनदेन के लिए आपको किसी बैंक से संबद्ध होने की आवश्यकता नहीं है। विकेंद्रीकृत प्रणाली के रूप में, इस आभासी मुद्रा पर किसी भी कंपनी या देश का एकाधिकार नहीं है।
  • वर्चुअल करेंसी का इस्तेमाल पिछले एक दशक से बढ़ रहा है क्योंकि इसमें किसी भी देश की कोई सीमा नहीं होती और उन पर किसी भी तरह का कोई टैक्स नहीं लगता। नतीजतन, पिछले दशक में इन आभासी मुद्राओं का कारोबार अरबों डॉलर तक पहुंच गया है।
  • कई देशों में बैंकों, होटलों, कंपनियों, वेबसाइटों ने वर्चुअल करेंसी को लेनदेन के लिए अपनाया है। इसलिए इस मुद्रा का मूल्य दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। यहीं से वर्चुअल करेंसी एक्सचेंज मार्केट आया। इन बाजारों में, भौतिक मुद्राओं के सापेक्ष दुनिया भर में आभासी मुद्राओं का मूल्य दैनिक आधार पर निर्धारित किया जाता है।
  • पहली आभासी मुद्रा, बिटकॉइन का मूल्य आसमान छू रहा है। बिटकॉइन जैसी सभी आभासी मुद्राओं की घुड़दौड़ का एक और उदाहरण भारत ही दे सकता है।
  • 28 अप्रैल 2019 को एक बिटकॉइन की कीमत 3 लाख 60 हजार रुपए थी, उसकी कीमत 28 मई 2019 को 6 लाख 6 हजार रुपए पहुंच गई। यानी अगर कोई अप्रैल में खरीदे गए बिटकॉइन को मई में बेचता है, तो वह एक महीने में 3 लाख रुपए की बड़ी कमाई कर सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here