बेनामी संपत्ति के लिए तीन वर्ष की सजा के कानून पर सर्वोच्च न्यायालय ने सुनाया बड़ा फैसला

चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह भी कहा कि संपत्ति जब्त करने का अधिकार पिछली तारीख से लागू नहीं होगा। यानी पुराने मामलों में इस कानून के तहत कार्रवाई नहीं होगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने बेनामी संपत्ति के लिए 3 साल की सजा का कानून निरस्त कर दिया है। तीन साल की सजा का प्रावधान बेनामी ट्रांजैक्शन (प्रोहिबिशन) एक्ट की धारा 3(2) में था। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह भी कहा कि संपत्ति जब्त करने का अधिकार पिछली तारीख से लागू नहीं होगा। यानी पुराने मामलों में इस कानून के तहत कार्रवाई नहीं होगी।

केंद्र सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के एक फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि बेनामी ट्रांजैक्शन कानून में संशोधन पिछली तारीख से लागू नहीं होगा। इस कानून के तहत सरकार को संपत्ति जब्त करने का मिला अधिकार पिछली तारीख से लागू नहीं हो सकता है। इसका मतलब है कि पुराने मामलों में इस कानून के तहत कार्रवाई नहीं हो सकती है।

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बेनामी संपत्ति का मतलब है कि वैसी संपत्ति जिसकी कीमत किसी और ने चुकाई और नाम किसी दूसरे व्यक्ति का हो। ये संपत्ति पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर भी खरीदी गई हो सकती है। ऐसा काला धन छुपाने के लिए किया जाता है।

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