जानिए… सर्वोच्च न्यायालय की कमेटी के सदस्यों को!

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कमेटी खुद कोई फैसला नहीं सुनाएगी, बल्कि वह हमें अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उसके आधार पर फैसला हम सुनाएंगे। कमेटी में डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी, अनिल घनवट,जीतेंद्र सिंह मान शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले के समाधान के लिए कमेटी का भी गठन कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि ये कमेटी किसान और सरकार यानी दोनों पक्षों से बात कर मामले को सुलझाने की कोशश करेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कमेटी खुद कोई फैसला नहीं सुनाएगी, बल्कि वह हमें अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उसके आधार पर फैसला हम सुनाएंगे। कमेटी में डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, अशोक गुलाटी, अनिल घनवट,भूपिंदर सिंह मान शामिल हैं।

पेश है,कमेटी में शामिल सदस्यों के परिचय

अनिल घनवट
अनिल घनवट शरद जोशी प्रणित शेतकरी संगठन के अध्यक्ष हैं। किसान शेतकरी संगठन की शुरुआत स्वर्गीय शरद जोशी ने की थी। पिछले दिनो अनिल घनवट ने कहा था कि सरकार किसानों से विचार-विमर्श करने के बाद कानूनों को लागू और संशोधन कर सकती है। हालांकि इन कानूनों को वापस लेने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इससे किसानों के लिए कई अवसर खुलेंगे।

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अशोक गुलाटी
कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी तीनों कृषि कानूनों के पक्ष में रहे हैं। 1991 से 2001 तक प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार और काउंसिल के सदस्य रहे अशोक गुलाटी ने कहा था कि इन तीनों कानूनों से किसानों को लाभ होगा। लेकिन सरकार यह बताने में सफल नहीं रही है। गुलाटी ने कहा था कि किसान और सरकार के बीच संवादहीनता को दूर किया जाना चाहिए।

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प्रमोद जोशी
अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के प्रमोद के. जोशी ने हाल ही में कहा था कि हमें एमएसपी से परे, नई मूल्य नीति पर विचार करने की आवश्यकता है। यह किसानों, उपभोक्ताओं और सरकार के हित में होना चाहिए। एमएसपी को घाटे को पूरा करने के लिए निर्धारित किया गया था। अब हम इसे पार चुके हैं और ज्यादातर वस्तुओं मे सरप्लस हैं।

भूपिंदर सिंह मान
मान भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष हैं और ये किसानों की समस्याओं को अच्छी तरह से समझते हैं। समझा जा रहा है कि किसानों के पक्ष रखने और मामले को सुलझाने की दिशा में कदम उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित कमेटी में इन्हें शामिल किया गया है।

किसानों ने किया कमेटी का विरोध
 किसान संगठनो की ओर से कमेटी का विरोध किया गया और कहा गया कि वे कमेटी के समक्ष पेश नहीं होंगे। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि अगर मामले का हल निकालना है तो पेश होना होगा। अब हर मामला कमेटी के सामने ही उठया जाएगा।

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