हिंदुस्थान पोस्ट की खबर पर मुहर… किसानों में खालिस्तानी भी!

किसान आंदोलन में खालिस्तानी लिंक की बात सामने आई है। केंद्र सरकार सर्वोच्च न्यायालय में इस पर हलफनामा दायर करेगी। न्यायालय ने सभी पक्षों की राय और सहमति बनाने के लिए एक कमेटी के गठन का आदेश दिया है साथ कृषि कानूनों पर स्थगन आदेश भी जारी किया है।

सर्वोच्च न्यायालय में संशोधित कृषि कानूनों पर सुनवाई के बीच एक बड़ी बात सामने आई है। सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया है कि किसानों के बीच प्रतिबंधित खालिस्तानियों ने घुसपैठ कर ली है। इसको लेकर खुफिया ब्यूरो की रिपोर्ट भी आई है। सरकार द्वारा इस स्वीकारोक्ति से हिंदुस्थान पोस्ट की उन खबरों पर मुहर लग गई है जिसमें कई बार इस आंदोलन में खालिस्तानियों की घुसपैठ की खबरें प्रकाशित की गई थीं।

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सर्वोच्च न्यायालय में अब केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणूगोपाल हलफनामा दायर करेंगे। ये हलफनामा किसानों के बीच प्रतिबंधित खालिस्तानियों की घुसपैठ को लेकर होगा। सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश एएस बोपन्ना और न्यायाधीश वी रामासुब्रमण्यम ने अटॉर्नी जनरल से पूछा था कि क्या प्रतिबंधित ऑर्गेनाइजेशन ने घुसपैठ की है तो अटार्नी जनरल ने इसकी पुष्टि की है।

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कैसे उठा ये मुद्दा?

  • इंडियन फार्मर्स असोशिएशन के संघ की ओर से सर्वोच्च न्यायालय में पक्ष रख रहे वकील पीएस नरसिम्हा ने न्यायालय को बताया कि…
    किसानों के आंदोलन में ‘सिख फॉर जस्टिस’ जैसी संस्थाएं सम्मिलित हैं। इस प्रकार के आंदोलन बहुत ही खरतनाक हैं।
  • मुख्य नायायाधीश ने अटॉर्नी जनरल से पुष्टि करने को कहा।
  • अटार्नी जनरल – हम कह चुके हैं कि खालिस्तानियों ने आंदोलन में घुसपैठ कर ली है। सरकार कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन करनेवाले एक लाख लोगों को राष्ट्रीय राजधानी में आने की अनुमति नहीं दे सकती है कि एक समूह संसद में जाए… दूसरा समूह सर्वोच्च न्यायालय में।
  • मुख्य न्यायाधीश – क्या ये आपके अधिकार में नहीं कि कितनी संख्या में लोग हैं और देखें कि वे हथियारों के साथ हैं यदि, उसमें प्रतिबंधित संस्था के द्वारा घुसपैठ की गई है।
  • अटार्नी जनरल – सरकार घुसपैठ पर खुफिया ब्यूरो की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लाएगी।

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