मनी लांड्रिंग कानून पर फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका, होगी सर्वोच्च सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को अपने इस फैसले में ईडी की शक्ति और गिरफ्तारी के अधिकार को बहाल रखने का आदेश दिया था।

मनी लांड्रिंग कानून पर अपने ही फैसले के खिलाफ 22 अगस्त को दायर पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। एक वकील ने चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए पुनर्विचार याचिका को सुनवाई के लिए लिस्ट करने की मांग की।

जब वकील ने चीफ जस्टिस से इस पुनर्विचार याचिका को मेंशन किया, तब चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या यह जस्टिस खानविलकर के फैसले पर है, तब मेंशन करनेवाले वकील ने कहा कि हां। उसके बाद चीफ जस्टिस ने इस मामले को लिस्ट करने का आदेश दिया। मनी लांड्रिंग एक्ट के प्रावाधानों को चुनौती देते हुए दो सौ के आसपास याचिकाएं दायर की गई थीं, जिस पर 27 जुलाई को जस्टिस एएम खानविलकर की अध्यक्षता वाली बेंच ने फैसला सुनाया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 जुलाई को अपने इस फैसले में ईडी की शक्ति और गिरफ्तारी के अधिकार को बहाल रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने पूछताछ के लिए गवाहों, आरोपियों को समन, संपत्ति जब्त करने, छापा डालने, गिरफ्तार करने और ज़मानत की सख्त शर्तों को भी बरकरार रखा था। कोर्ट ने मनी लांड्रिंग के आरोपित याचिकाकर्ताओं की गिरफ्तारी पर चार हफ्ते की रोक लगाई थी ताकि वे सक्षम कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर सकें। कोर्ट ने कहा था कि मनी लांड्रिंग एक्ट में किए गए संशोधन को वित्त विधेयक की तरह पारित करने के खिलाफ मामले पर बड़ी बेंच फैसला करेगी। कोर्ट ने कहा था कि मनी लांड्रिंग एक्ट की धारा 3 का दायरा बड़ा है।

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कोर्ट ने कहा था कि धारा 5 संवैधानिक रुप से वैध है। कोर्ट ने कहा कि धारा 19 और 44 को चुनौती देने की दलीलें दमदार नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि ईसीआईआर एफआईआर की तरह नहीं है और यह ईडी का आंतरिक दस्तावेज है। एफआईआर दर्ज नहीं होने पर भी संपत्ति को जब्त करने से रोका नहीं जा सकता है। एफआईआर की तरह ईसीआईआर आरोपित को उपलब्ध कराना बाध्यकारी नहीं है।

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