अहमदाबाद ब्लास्ट के फरार आरोपियों का अब बचना है मुश्किल, पुलिस ऐसे कस रही है शिकंजा

अहमदाबाद के इस आतंकी घटना के बाद इंडियन मुजाहिद्दीन ने दावा किया था कि वह यह धमाका 2002 में गोधरा कांड का बदला लेने के लिए किए थे।

अहमदाबाद में वर्ष 2008 में हुए सीरियल बम ब्लास्ट मामले में अब तक फरार 4 आरोपितों को पुलिस अब किसी भी हाल में ढूंढ निकालेगी। पुलिस ने इस दिशा में प्रयत्न तेज करने के साथ आरोपितों की सुराग बताने वाले को 2 लाख रुपये का इनाम भी देगी। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने इस संबंध में सूचना जारी की है। भाटिया ने कहा कि बम ब्लास्ट में शामिल आरोपितों को किसी भी परिस्थिति में खोजना जरूरी है। इस केस के इन चार फरार आरोपितों की गिरफ्तारी देश की सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए अत्यंत जरूरी है।

38 दोषियों को सुनाई गई है फांसी की सजा
26 जुलाई, 2008 को अहमदाबाद शहर के मणिनगर, सिविल अस्पताल समेत 21 जगहों पर हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 56 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मामले में इस साल 18 फरवरी को अहमदाबाद की विशेष अदालत ने बम धमाके के आरोपियों को दोषी ठहराते हुए इनमें 38 को फांसी की सजा और बाकी 11 दोषियों को आजीवन कैद की सजा सुनाई। देश के इतिहास में यह पहला मामला है जब इतने सारे दोषियों को एक साथ फांसी की सजा सुनाई गई है।

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गोधरा कांड के बदले में आतंकी संगठन ने कराए थे धमाके
अहमदाबाद के इस आतंकी घटना के बाद इंडियन मुजाहिद्दीन ने दावा किया था कि वह यह धमाका 2002 में गोधरा कांड का बदला लेने के लिए किए थे। मणिनगर से धमके शुरू हुए थे जो उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी का विधानसभा क्षेत्र था। मणिनगर से दो जिंदा बम बरामद किए गए थे तो वहीं मणिनगर में कुल तीन जगहों पर धमाके हुए थे। कुल 21 धमाकों में दो सिविल अस्पताल और एलजी अस्पताल में हुए थे। यह धमाके आतंकियों ने टिफिन को साइकिल में रखकर किया था। इन धमाकों में इंडियन मुजाहिद्दीन और स्टुडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया से जुड़े आतंकी शामिल थे। धमाके से 5 मिनट पहले आतंकियों ने न्यूज एजेंसियों को मेल करके यह धमाके रोकने की चुनौती भी दी थी।

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