यल्गार वाले तेलतुम्बड़े को राहत नहीं, ये है कारण

भीमा कोरेगांव में आयोजित यल्गार परिषद में अर्बन नक्सल की भूमिका जगजाहिर है।

यल्गार परिषद के सदस्य आनंद तेलतुम्बड़े को विशेष न्यायालय ने जमानत नकार दिया है। तेलतुम्बड़े नवी मुंबई के तलोजा जेल में बंद हैं। उनके विरुद्ध 2018 में भीमा कोरेगांव में हुई हिंसा के मामले में पर्याप्त साक्ष्य होने के बाद न्यायालय ने यह निर्णय दिया है।

अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में बताया कि आनंद तेलतुम्बड़े प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई (माओवीदी) का सक्रिय सदस्य है। सुनवाई में बताया गया कि आनंद का भाई मिलिंद तेलतुम्बड़े इस प्रकरण में फरार आरोपियों में शामिल है। इस प्रकरण में एनआईए की विशेष न्यायालय ने आदेश दिया है कि, जमानत याचिका को इस आधार पर स्वीकर नहीं किया जा सकता कि, आरोपी तब तक निर्दोष है जब तक सक्षम न्यायालय उसे दोषी न करार दे। आनंद तेलतुम्बड़े ने आरोप लगाया है कि जांच एजेंसी के पास उनके विरुद्ध जो आरोप लगा रही है उसे प्रमाणित करने के लिए उनके पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।

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ऐसा है प्रकरण
ये घटना 1 जनवरी, 2018 की है। पुणे शहर के शनिवार वाड़ा मे यल्गार परिषद का आयोजन किया गया था। जिसमें माओवादी विचारों से प्रेरित लोग सम्मलित हुए थे। आरोप लगा कि इन लोगों के भड़काऊ भाषणों के कारण ही हिंसा भड़की थी। इस हिंसा के पीछे के कारणों की जांच करते हुए पुलिस को रोना विल्सन नामक एक आरोपी के घर से चिट्ठियां मिली थीं जिनमें राजीव गांधी की हत्या की भांति योजना बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने का उल्लेख था। इसके बाद संबंधित लोगों के घर छापे मारे गए, 250 ईमेल संदेश खंगाले गए। इसके आधार पर देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें हैदराबाद के वापमंथी विचारक वरवरा राव, ठाणे से अरुण फरेरा, मुंबई से वरनॉन गोन्सालविज, फरीदाबाद से सुधा भारद्वाज, दिल्ली के रहनेवाले गौतम नवलखा और रांची से स्टीन स्वामी, आनंद तेलतुम्बड़े को गिरफ्तार किया गया।

पत्र ने खोल दी पोल
(जून 2018 में दिल्ली के मुनरिका से मिला था पत्र)
नरेंद्र मोदी 15 राज्यों में भाजपा को स्थापित करने में सफल हुए हैं। यदि यह चलता रहा तो पार्टी के लिए बड़ी दिक्कत खड़ी हो जाएगी। कामरेड किशन और कुछ अन्य सीनियर कामरेड ने मोदी राज को खत्म करने के लिए कुछ मजबूत कदम सुझाए हैं। हम सभी राजीव गांधी जैसे हत्याकांड पर विचार कर रहे हैं। ये आत्मघाती जैसा मालूम होता है और इसकी भी अधिक संभावनाएं हैं कि हम असफल हो जाएं। लेकिन हमें लगता है कि पार्टी हमारे प्रस्ताव पर विचार करे, उन्हें रोड शो में टारगेट करना एक असरदार रणनीति हो सकती है।

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