महाठग सुकेश ने फोड़ा लेटर बम, केजरीवाल को दी ये चुनौती

जेल से लिखे अपने चौथे पत्र में सुकेश का आरोप है कि उसने जेल प्रशासन व दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन की धमकियों व दबाव के चलते कानून का सहारा लेना ठीक समझा है।

दिल्ली के मंडोली जेल में बंद ठगी के आरोपित सुकेश चंद्रशेखर ने उसकी चिट्ठियों की टाइमिंग को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सवालों का जवाब देते हुए 8 नवंबर को एक और चिट्ठी जारी की है। सुकेश ने नई चिट्ठी में मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से उसके द्वारा लिखी गई चिट्ठियों की टाइमिंग पर उठाए प्रश्नों का जवाब दिया है।

केजरीवाल से मांगा इस्तीफा
इस चिट्ठी में उसने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से प्रश्न किया है और चुनौती दी है कि उसने जो आरोप लगाए हैं, उसे वह गलत साबित करें या फिर पद से इस्तीफा दें। साथ ही कहा है कि बेवजह का बयान देकर मुद्दे को भटकाने की जगह सीधे तौर पर उसके सवालों का जवाब दिया जाए।

जेल से फोड़ा लेटर बम
जेल से लिखे अपने चौथे पत्र में सुकेश का आरोप है कि उसने जेल प्रशासन व दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन की धमकियों व दबाव के चलते कानून का सहारा लेना ठीक समझा है। उपराज्यपाल को पत्र लिखने के लिए कहीं से किसी ने दबाव नहीं डाला है। सुकेश ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी का शागिर्द नहीं है।

खास बातेंः
-सुकेश ने किसी से भी न डरने की भी बात कही है। उसने कहा है कि अगर उपराज्यपाल को लिखा उसका पत्र गलत है तो वह कोई भी कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार है। भले ही उसके लिए उसे फांसी पर लटकना पड़े लेकिन अगर मुख्यमंत्री उसे झूठा साबित नहीं कर पाते तो उनको इस्तीफा देना चाहिए। पूरे मामले की सीबीआई जांच करवानी चाहिए।

-उसने कहा कि जेल प्रशासन और सत्येंद्र जैन ने धमकियां देकर व दबाव डालकर पंजाब व गोवा चुनाव के लिए फंड मांगा था। यह वही समय था, जब मामले की जांच चल रही थी। लगातार मिल रही धमकियों से परेशान होकर उसने कानून का सहारा लिया और उपराज्यपाल से शिकायत की।

-सुकेश ने इस पत्र में लिखा है कि उसके लेटर को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता कह रहे हैं कि यह सब जानबूझ कर किया गया है, ये अब चुनाव के दौरान ही क्यों आरोप लगाए जा रहे हैं, जब मुझसे ईडी और सीबीआई ने जवाब तलब किए मैं तब क्यों नहीं बोला ? सुकेश ने पत्र में लिखा है कि मैं इसका जवाब दूंगा, मैं आपको बता दूं कि मैं चुप रहा और सब कुछ नजरअंदाज करता रहा। लेकिन, जेल के माध्यम से मुझे मिल रही आपकी लगातार धमकियों और दबाव के कारण मुझे मुंह खोलना पड़ा।

-इसीलिए मुझे मजबूरी में कानून का सहारा लेना पड़ा। आप अपनी पुरानी स्टाइल के इस नाटक को बंद करो, यह बहुत स्पष्ट है और सभी देख सकते हैं कि आप इस मुद्दे को छुपाने और मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

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