क्या है नेशनल हेराल्ड प्रकरण?

नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों के अधिग्रहण को लेकर आर्थिक अनियमितताओं का आरोप लंबे काल से लगता रहा है। इस प्रकरण में गांधी परिवार और कांग्रेस के कुछ शीर्ष नेता केंद्रीय जांच एजेंसियों की जांच की परिधि में हैं।

नेशनल हेराल्ड की मुख्य कंपनी असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के ऋण व संपत्तियों के यंग इंडियन लिमिटेड में ट्रांसफर पर अनियमितताओं के आरोप हैं। इस प्रकरण में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के विरुद्ध प्रवर्तन निदेशालय जांच कर रहा है। यह प्रकरण क्या है और कैसे सामने आया भी जानना अवश्यक है।

ऐसे कानूनी परिधि में आया प्रकरण
वर्ष 2012 में भारतीय जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने न्यायालय में एक शिकायत दर्ज कराई थी। जिसमें आरोप लगाया गया था कि, असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के यंग इंडियन लिमिटेड द्वारा किये गए अधिग्रहण में कांग्रेस के नेता धोखाधड़ी और ब्रीच ऑफ ट्रस्ट के अंतर्गत आरोपी हैं। यंग इंडियन लिमिटेड ने नेशनल हेराल्ड की स्थाई संपत्तियों को गलत रूप से लिया है। जिसमें नेशनल हेराल्ड की दो हजार करोड़ रुपए की संपत्ति का यंग इंडियन लिमिटेड द्वारा किया गया अधिग्रहण भी आता है।

आर्थिक अनियमितता के लगे आरोप
26 फरवरी 2011 में कांग्रेस ऋण के बोझ से दबे असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (नेशनल हेराल्ड) की 90 करोड़ रुपए की देनदारी को अपने जिम्मे ले लिया। जिसका व्यापारिक अर्थ ये लगा कि, कांग्रेस पार्टी ने नेशनल हेराल्ड की संचालनकर्ता कंपनी असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को 90 करोड़ रुपए का ऋण दिया है।

सोनिया गांधी और राहुल गांधी की 38-38 प्रतिशत, मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडिस के 24-24 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली एक कंपनी यंग इंडियन लिमिटेड की स्थापना की गई। जिसे असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के नौ करोड़ शेयर सौंप दिये गए। यंग इंडियन लिमिटेड को कांग्रेस पार्टी द्वारा दिये गए 90 करोड़ रुपए की भुगतान करना था। परंतु, कांग्रेस ने इस ऋण को माफ कर दिया। जिसका अर्थ ये हुआ कि, 10 रुपए मूल्य के नौ करोड़ शेयर के साथ असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड का मालिकाना यंग इंडियन लिमिटेड को बिना किसी भुगतान के ही मिल गया।

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स्वामी की शिकायत में इनके नाम
सुब्रमण्यम स्वामी की शिकायत में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, पत्रकार सुमन दूबे और टेक्नोक्रैट सैम पित्रोदा का समावेश है। वर्ष 2016 में सोनिया गांधी, राहुल गांथी समेत पांचों आरोपियों को इस प्रकरण में राहत मिल गई थी। न्यायालय ने उन्हें प्रकरण की सुनवाई में न्यायालय न आने की छूट दे दी। वहीं इस प्रकरण को खारिज करने की याचिका को अस्वीकार कर दिया था।

असोसिएटेड प्रेस लिमिटेड की भूमि का आबंटन रद्द
वर्ष 2018 में केंद्रीय प्रशासन ने निर्णय लिया कि, वर्ष 1960 में असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पट्टे पर दी गई भूमि को खाली कराया जाए। इसके पीछे तर्क था कि, कंपनी पिछले लंबे काल से कोई समाचार पत्र नहीं छाप रही है। जबकि, भूमि का आंबटन इसी आधार पर किया गया था। प्रशासन ने इस आधार पर असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को भूखंड खाली करने की नोटिस जारी की थी। जिसका विरोध करते हुए सर्वोच्च न्यायालय में प्रकरण पहुंचा, इस प्रकरण की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के विरुद्ध पब्लिक प्रिमाइसेस एक्ट 1971 के अंतर्गत की जा रही कार्रवाई पर रोक लगा दी।

शेयर धारकों के आरोप
असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (नेशनल हेराल्ड) के शेयर धारकों ने भी आरोप लगाया था कि, उन्हें यंग इंडियन लिमिटेड की ओर असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड के अधिग्रहण के पहले कोई सूचना नहीं दी गई थी। इसके शिकायतकर्ताओं में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण और मुख्य न्यायाधीश रहे मार्कंडेय काटजू का भी समावेश है।

नेशनल हेराल्ड की स्थापना
नेशनल हेराल्ड समाचार पत्र वर्ष 1938 में पंडित जवाहरलाल नेहरू और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा शुरू किया गया था। इसे असोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) द्वारा प्रकाशित किया जाता था। यह कांग्रेस का मुखपत्र हुआ करता था। नेशनल हेराल्ड के साथ ही उर्दू में कौमी आवाज और हिंदी में नवजीवन का प्रकाशन भी होता था, जो वर्ष 2008 तक चला और इसके बाद 90 करोड़ रुपए के ऋण के कारण बंद हो गया था।

इस कंपनी के वर्ष 2010 में 1057 शेयर धारक थे। वर्ष 2011 में इस कंपनी के ऋण और संसाधनों को यंग इंडिया लिमिटेड में स्थानांतरित कर दिया गया।

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