पीएफआई सदस्यों पर दूसरी बड़ी कार्रवाई, केरल के कट्टरवादियों पर चला डंडा

देश में बड़े आतंकी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक असोशिएशन (सिमी) पर प्रतिबंध के बाद पॉप्यूलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने उसकी जगह ले ली थी। इन आरोपों को अधिक बल तब मिला जब देश के विभिन्न स्थानों पर हुई आतंकी गतिविधियों में पीएफआई के सदस्यों की संलिप्तता मिली।

केरल में पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के 248 सदस्य घर से भी गए और घाट से भी गए की स्थिति में आ गए हैं। उच्च न्यायालय ने एक प्रकरण की सुनवाई में इन सदस्यों की संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया था। जिसका पालन करते हुए दूसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। पीएफआई को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने प्रतिबंधित कर दिया था।

प्रतिबंधित कट्टरवादी संगठन पीएफआई पर देश भर में आतंकी गतिविधियों में संलिप्तता और विदेशी आतंकी संगठनों के लिए काम करने को लेकर कार्रवाई हुई है। इस कार्रवाई के अंतर्गत पीएफआई के सदस्यों को गिरफ्तार भी किया गया है। पीएफआई ने केरल में सितंबर 2022 में पीएफआई सदस्यों पर कार्रवाई को लेकर प्रदर्शन किया था, जिसमें सरकारी संपत्ति को क्षतिग्रस्त किया गया था। इस प्रकरण की सुनवाई केरल उच्च न्यायालय में चल रही थी, जिसमें क्षति की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने आदेशों का पालन करते हुए पीएफआई के 248 सदस्यों की संपत्तियां जब्त की हैं। उच्च न्यायालय ने आदेश के पालन में राज्य सरकार द्वारा की गई देरी को लेकर टिप्पणी की है।

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मलप्पुरम से अधिक जब्ती
सरकार की ओर से प्रस्तुत की गई एक्शन टेकेन रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक जब्ती कार्रवाई मलप्पुरम जिले से हुई है, जिसमें 126 संपत्तियां जब्त की गई हैं। इसके अलावा पलक्कड जिले से 23 संपत्ति, कोझिकोड से 22 संपत्ति, थिरुसूर जिले से 18 संपत्ति व वायनाड और कुन्नूर जिले से 11 संपत्ति जब्त की गई हैं।

हड़ताल में किया लाखो का नुकसान
राज्य सरकार ने न्यायालय को 7 नवंबर, 2022 को सूचित किया था कि, पीएफआई की हड़ताल में हुई तोड़फोड़ और हिंसा में 86 लाख रुपए की संपत्ति को क्षतिग्रस्त किया गया था। सितंबर 2022 में पीएफआई संगठन पर देशव्यापी कार्रवाई हो रही थी। इसके विरोध में केरल के पीएफआई सदस्यों ने हड़ताल की थी, इसमें हिंसा और तोड़फोड़ की गई थी। जिसमें सरकार और जनता को नुकसान का सामना करना पड़ा था।

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