कतर: भारतीय नौसेना के पूर्व कर्मियों से मिले दूतावास के कर्मी

कतर की सुरक्षा एजेंसियों ने कॉन्ट्रेक्ट पर सेवाएं देनेवाले आठ भारतीयों को चार महीने से हिरासत में रखा है। इसकी कोई पूर्व सूचना भारत सरकार को नहीं दी गई है।

कतर की हिरासत में पिछले चार महीने से बंद भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों से दूसरी बार मिलने की अनुमति मिल गई है। इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय ने दी है। मंत्रालय हिरासत में रखे गए आठ लोगों के परिवारों को वीजा दिलाने के प्रयत्न में है।

कतर की नौसेना को सेवाएं देनेवाली कंपनी में भारत के आठ नागरिक कार्य कर रहे थे। यह सभी भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी रहे हैं। जो सेवानिवृत्ति के बाद कतर की कंपनी में अपनी सेवाएं दे रहे थे। यह कंपनी कतर की नौसेना को प्रशीक्षण समेत विभिन्न सेवाएं देती है।

हम परिवार के उन सदस्यों की भावनाएं समझ सकते हैं जो दोहा में हैं और वहां जाना चाहते हैं। हम प्रयत्न कर रहे हैं कि उन्हें वीज़ा मिल जाए, जिससे वे जा पाएं। नई दिल्ली आठ लोगों के परिवारों को सभी संभावित सहायता करने का कार्य कर रही है। हमारे दूतावास के कर्मी हिरासत में रखे कर्मियों से मिलने में सफल हुए हैं। उनका कुशल क्षेम जाना है। हम उनकी हर संभव सहायता करेंगे।
अरिंदम बागची, प्रवक्ता- विदेश मंत्रालय भारत

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कतर की कंपनी में काम
कतर सरकार की हिरासत में रखे गए आठ भारतीय ‘दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टंसी’ के लिए काम कर रहे थे। दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी कतर डिफेंस, स्थानीय सुरक्षा और सरकार की स्थानीय साझीदार है। इस कंपनी के सीईओ खमीस अल अजमी हैं जो रॉयल ओमान एयर फोर्स के पूर्व स्क्वॉड्रन लीडर हैं। इस प्रकरण में जिनके हिरासत में लिये जाने की चर्चा है, उसमें भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त कमांडर पुर्णेंदु तिवारी भी है। उन्हें वर्ष 2019 में प्रवासी भारतीय सम्मान से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों सम्मानित किया चुका है। इस विषय में कतर ने कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।

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