बंगाल पुलिस भर्ती बोर्ड ने 1000 मुस्लिम लड़कियों को किया परीक्षा से बाहर! ये है वजह

पुलिस भर्ती बोर्ड ने 26 सितंबर 2021 को राज्य पुलिस कांस्टेबल्स व महिला कांस्टेबल्स के लिए प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी। लेकिन कई कारणों से 30 हजार से अधिक छात्र यह परीक्षा नहीं दे पाए थे। उनमें 1000 मुस्लिम लड़कियां भी शामिल थीं।

पश्चिम बंगाल पुलिस भर्ती के लिए मंगाए गए आवेदन पत्र में कई मुस्लिम लड़कियों ने हिजाब पहनकर फोटो लगाई थी। ऐसी 1000 से ज्यादा लड़कियों के आवेदन को पश्चिम बंगाल पुलिस भर्ती बोर्ड ने रद्द कर दिया है। फिलहाल मामले में विवाद बढ़ने पर कोलकाता उच्च न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया पर स्थगन आदेश दे दिया है।

अपने आवेदन पत्र को रद्द किए जाने के बाद मुस्लिम लड़कियों ने कोलकाता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। उसके बाद उच्च न्यायालय के जस्टिस अरिंदम मुखर्जी ने इसकी अगली सुनवाई तक पुलिस भर्ती प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

बोर्ड के निर्णय पर कही ये बात
फिलहाल कोर्ट के इस फैसले को याचिकाकर्ता महिलाओं ने अपनी जीत बताते हुए खुशी का इजहार किया है। उन्होंने न्यायापालिका में भरोसा जताते हुए न्याय मिलने की उम्मीद जताई है। मुस्लिम लड़कियों की वकील फिरदौस समीम ने कहा है कि संविधान मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने की अनुमति देता है, इसलिए पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा लिया गया निर्णय असंवैधानिक है।

यह है मामला
बता दें कि बोर्ड ने 26 सितंबर 2021 को राज्य पुलिस कांस्टेबल्स और महिला कांस्टेबल्स के लिए प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की थी। बोर्ड ने 6 सितंबर को परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र जारी किया था। लेकिन कई कारणों से 30 हजार से अधिक छात्र यह परीक्षा नहीं दे पाए थे। उनमें ये मुस्लिम लड़कियां भी शामिल थीं।

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क्या है नियम?
डब्ल्यूबीपीआरबी के नियम के अनुसार आवेदक की फोटो में आवेदक का चेहरा किसी भी तरह से ढका हुआ नहीं होना चाहिए। गाइडलाइंस में स्पष्ट लिखा गया है, आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे फोटोग्राफ और हस्ताक्षर के स्थान पर अन्य वस्तुओं की तस्वीरें अपलोड न करें। चेहरा/ सिर ढकने वाला फोटोग्राफ, आंखों को ढकने वाले दूप के चश्मे/ टिंटेड ग्लासेस को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सुरक्षा से खिलवाड़
स्पष्ट दिशानिर्देश के बावजूद इन मुस्लिम लड़कियों द्वारा अपने आवेदन में हिजाब वाला फोटोग्राफ लगाया जाना सुरक्षा से खिलवाड़ ही है। जो लोग इस तरह के प्रशासनिक और सुरक्षा के लिए जरुरी नियमों को पालन करने को तैयार नहीं हैं, उनसे पुलिस जैसे पदों की जिम्मेदारी निभाने की कितनी उम्मीद की जा सकती है, यह सवाल भी अहम है।

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