Shraddha murder case: ‘… तो आज श्रद्धा जिंदा होती!’

वेदभूषण ने पूरे हत्याकांड में बताया कि नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट करवाकर पुलिस ज्यादा से ज्यादा साक्ष्य जुटाना चाहती है।

दक्षिण जिले के महरौली इलाके में हुए श्रद्धा हत्याकांड की जांच कर रही दिल्ली पुलिस पुख्ता साक्ष्य इकट्ठा करने में जुटी हुई है। ऐसे में श्रद्धा का दो साल पहले लिखा लेटर भी मुंबई पुलिस को मिला है। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल है।

दिल्ली पुलिस महासंघ के अध्यक्ष व पूर्व एसीपी वेद भूषण ने बताया कि इस मामले में बड़ी चूक हुई है। अगर पुलिस उक्त शिकायत पर तुरंत एक्शन लेती तो शायद आज श्रद्धा जिंदा होती। पुलिस को उसी समय आईपीसी की धारा 307/506 व अन्य धाराओं में केस दर्ज कर आरोपित से पूछताछ करनी चाहिए थी।

महाराष्ट्र सरकार ने दिए जांच के आदेश
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने नवंबर 2020 में श्रद्धा वाल्कर के लिखे गए एक लेटर पर पालघर पुलिस की ‘निष्क्रियता’ की जांच के आदेश दिए हैं। श्रद्धा वाल्कर ने शिकायत पत्र में लिव-इन पार्टनर आफताब अमीन पूनावाला से मौत की धमकी का जिक्र किया था। इस पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जिनके पास गृह विभाग भी है, ने कहा कि पत्र में बहुत गंभीर कंटेंट है, और कहा कि मामले में जांच की जरूरत है।

पहले ही बता चुकी थी श्रद्धा हत्या की कहानी 
शिकायत लेटर के अनुसार, श्रद्धा वालकर को दो साल पहले ही आफताब ने टुकड़ों में काटकर हत्या करने की धमकी दी थी। ऐसी शिकायत महाराष्ट्र पुलिस के पास साल 2020 में दर्ज की गई थी। शिकायत में श्रद्धा ने लिखा था कि, “आज उसने मुझे जान से मारने की कोशिश की और वह मुझे डराता है, मुझे ब्लैकमेल करता है कि वह मुझे मार डालेगा, मेरे टुकड़े-टुकड़े करके फेंक देगा। वह मेरे साथ पिछले छह महीने से मारपीट कर रहा है लेकिन मुझमें इतनी हिम्मत नहीं थी कि मैं पुलिस में उसकी शिकायत कर सकूं क्योंकि वह मुझे जान से मारने की धमकी दे रहा था।

आगे ” श्रद्धा ने शिकायत में लिखा था, “आफताब के माता-पिता उसके हिंसक व्यवहार के बारे में जानते थे और वे उससे मिलने के लिए हफ्ते में एक बार घर आते थे। पिटाई के बाद भी हम एक साथ रहे, क्योंकि हम आने वाले दिनों में शादी करने वाले थे। लेकिन अब मैं उसके साथ नहीं रहना चाहती लेकिन वो मुझे मारने की धमकी दे रहा है।”

पुलिस के पास है पूरे साक्ष्य, सजा होना तय
वेदभूषण ने पूरे हत्याकांड में बताया कि नार्को व पॉलीग्राफ टेस्ट करवाकर पुलिस ज्यादा से ज्यादा साक्ष्य जुटाना चाहती है। हालांकि पुलिस के पास पार्यप्त साक्ष्य है, जो आरोपित को सजा दिला सकती है। आरोपित द्वारा बार-बार नई कहानी बताने पर यह टेस्ट करवाया जा रहा है।

रंगा-बिरला मामले का दिया हवाला
इससे पुलिस हत्याकांड की कड़ी व हत्या में इस्तेमाल हथियार को बरामद करना चाहती है। वेदभूषण ने बहुचर्चित रंगा-बिरला मामले का हवाला देते हुए कहा कि उस मामले में भी पुलिस ने अह्म साक्ष्य जुटाकर आरोपितों को सजा दिलाई थी। श्रद्धा मामले में जो शरीर के अवशेष मिले है उसकी जांच होते ही आरोप सिद्ध हो जायेंगे और इसी से साक्ष्य से आरोपित को सजा भी मिल जायेगी।

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