ये हैं, मुंबई के टॉप 5 गणेशोत्सव मंडल!

लोग गणेशोत्सव की धूम और भव्यता को याद कर कोरोना काल में लगी पाबंदियों के कारण मायूस हो रहे हैं। इसके बावजूद इस त्योहार का महत्व आज भी बरकरार है।

मुंबई का गणेशोत्सव देश ही नहीं, विदेशों में भी मशहूर है। हालांकि पिछले दो साल से अन्य त्योहारों के साथ ही इस पर्व पर भी कोरोना महामारी का साया मंडरा रहा है। इसलिए पिछले साल की तरह इस साल भी इस त्योहार पर सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन मुंबईकरों के मन-मस्तिष्क में कोरोना काल से पहले का गणेशोत्सव इस तरह रचा-बसा है कि उसे भूला पाना मुश्किल ही नहीं, असंभव है।

लोग गणेशोत्सव की धूम और भव्यता को याद कर कोरोना काल में लगी पाबंदियों के कारण मायूस हो रहे हैं। इसके बावजूद इस त्योहार का महत्व आज भी बरकरार है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि इस महामारी के समाप्त होने के बाद एक बार फिर पहले की तरह ही इस त्योहार को जोश और जुनून के साथ मनाया जाएगा। फिलहाल हम मुंबई के टॉप फाइव गणेशोत्व मंडलों के बारे में जानते हैं।

ये हैं मुंबई के टॉप फाइव गणेशोत्व मंडल

1-लालबाग का राजा
गणेशोत्सव के दौरान गणपति बप्पा मोरया की गूंज तो मुंबई के हर गली-चौराहे पर सुनाई देती है लेकिन लालबाग का राजा की बात ही कुछ और है। यह मुंबई और महाराष्ट्र ही नहीं, देश-विदेश में भी मशहूर है। इस मंडल की स्थापना 1934 में की गई थी। कोरोना काल से पहले गणेशोत्व के दौरान यहां की रौनक और श्रद्धालुओं की श्रद्धा देखते ही बनती थी। एक अनुमान के तहत यहां हर दिन लगभग डेढ़ लाख श्रद्धालु विघ्नहर्ता के दर्शन करते थे।

बप्पा के दर्शन के लिए एक किलोमीटर की कतार
श्रद्धालुओं के साथ ही यहां का गणेशोत्व मीडिया के लिए भी आकर्षण का केंद्र होता है। यहां भक्तों की सबसे अधिक भीड़ शाम में होती है। दर्शन के लिए भक्तों की एक किलोमीटर तक की लाइन लगती है और दर्शन में घंटों लग जाते हैं। यहां तक कि कई बार लोग भगवान गणेश के दर्शन के लिए 24 घंटे कतार में खड़े रहते हैं। इसकी विशेषता यह भी है कि कांबली आर्ट का कांबली परिवार 1935 से यहां की गणेश मूर्ति बना रहा है। इसकी डिजाइन पेटेंट है। यहां की गणेश मूर्ति के विसर्जन के लिए भव्य तैयारी की जाती है।

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करोड़ों रुपए का चढ़ावा
यहां दर्शन के लिए दो लाइनें होती थीं। सामान्य और खास। खास या विशेष कतार के भक्तों को भगवान के चरण छूने का अवसर मिलता है, वहीं जनरल कतार में लगने वाले श्रद्धालुओं को 10 मीटर दूर से ही भगवान के दर्शन करने पड़ते हैं।यहां चढ़ावे में करोड़ों रुपए खजाने में आते हैं। इन पैसों को कई लोग कई दिनों तक गिनते हैं। भगवान के चढ़ावे में पैसे के साथ ही सोना, चांदी और हीरे भी शामिल रहते हैं।

2-गणेश गली का राजा
गणेश गली का राजा भी गणेशभक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र हुआ करता है। यह मुंबई का काफी पुराना मंडल है। गेणेशोत्व के दौरान मुंबई आने वाले गणेश भक्तों के साथ ही मुंबई के श्रद्धालु भी यहां बप्पा के दर्शन करने के लिए लाखों की संख्या में आते हैं। यहां भगवान गणेश की आकर्षक मूर्ति सबका मन मोह लेती है। यहां भी भक्त दिल खोलकर भगवान के चरणों में चढ़ावा चढ़ाते हैं और बप्पा के दर्शन के साथ ही आशीर्वाद भी लेते हैं।

ऐतिहासिक महत्व
यह मंडल हर वर्ष एक नए विषय को लेकर गणेश प्रतिमा स्थापित करता है। 1928 में यहां मिल श्रमिकों की थीम पर मंडल को सजाया गया था। यहां प्रदूषण रोकने के लिए मूर्ति बनाने में प्लास्टर ऑफ पेरिस का इस्तेमाल किया जाता है।

3-खेतवाड़ी का राजा
दक्षिण मुंबई के खेतवाड़ी में बप्पा का पंडाल बहुत ही आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और बप्पा की बहुत ही आकर्षक मूर्ति विराजमान होती है। पुरस्कार विजेता खेतवाडी का राजा को मुंबई की सबसे शानदार गणेश मूर्तियों में से एक माना जाता है। इस मंडल की स्थापना 1959 में हुई थी, लेकिन इसे वर्ष 2000 में तब प्रसिद्धि मिली, जब इसने भारतीय इतिहास में 40 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा स्थापित की। यहां बप्पा की प्रतिमा को असली सोने और हीरे के गहनों से सजाया जाता है।

अतिरिक्त आकर्षण
खेतवाड़ी का अतिरिक्त आकर्षण यह है कि इस क्षेत्र की लगभग हर गली में एक गणेश मूर्ति स्थापित की जाती है, इसलिए यहां श्रद्धालुओं को देखने के लिए बहुत कुछ होता है। दिन के दौरान यात्रा करना सबसे अच्छा है क्योंकि शाम से आधी रात तक पीक टाइम होता है।

4-अंधेरी का राजा
अंधेरी का राजा मुंबई के उपनगरों में उतना ही मशहूर है, जितना लालबाग का राजा दक्षिण मुंबई में। मंडल की स्थापना 1966 में टोबैको कंपनी, टाटा स्पेशल स्टील और एक्सेल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के श्रमिकों द्वारा की गई थी। वे लालबाग छोड़कर अंधेरी में रहने आ गए थे। यहां पांच दिनों के लिए बप्पा की मूर्ति को स्थापित किया जाता है। यहां स्थापित होने वाले विघ्नहर्ता की मूर्ति और पंडाल काफी आकर्षक होते हैं। इस कारण यह काफी मशहूर है। श्रद्धालु यहां हर दिन बड़ी संख्या में बप्पा के दर्शन करने आते हैं। वे यहां भी चढ़ावे में पैसे के साथ ही एक से बढ़कर एक कीमती वस्तुएं लाते हैं।

इन क्षेत्रों से गुजरती है शोभा यात्रा
यह एकमात्र मूर्ति है, जिसका विसर्जन संकष्टी चतुर्थी को किया जाता है। इसके विसर्जन में करीब 20 घंटे लगते हैं। विसर्जन के लिए निकाली गई शोभा यात्रा आजाद नगर , वीरा देसाई रोड, जेपी रोड अंबोली, एसवी रोड, अंधेरी मार्केट, नवरंग सिनेमा, सोनी मोनी, अपना बाजार, इंडियन ऑयल नगर जंक्शन, चार बंगला, सात बंगला, वर्सोवा बस डिपो आदि इलाकों से गुजरती है।

5-जीएसबी सेवा किंग्स सर्कल
यहां बप्पा की मूर्ति को गोल्ड गणेश के नाम से भी जाना जाता है। इसका कारण यह है कि यहां भगवान गणेश को असली गोल्ड से सजाया जाता है। इस मंडल के पास 60 किलो से भी अधिक सोना है। इसे शहर का सबसे अमीर गणेशोत्सव मंडल माना जाता है। इसकी स्थापना 1954 में कर्नाटक के गौड़ सारस्वत ब्राह्मण समाज द्वारा की गई थी। वे मुंबई में समृद्ध हैं और वे विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों के साथ-साथ गणेशोत्सव भी भव्य रुप में आयोजित करते हैं। यहां बप्पा की मूर्ति मिट्टी से तैयार की जाती है। इसके साथ ही यहां दक्षिण भारत की संस्कृति की झलक मिलती है। इस मंडल द्वारा पांच दिनों के लिए बप्पा की मूर्ति स्थापित की जाती है।

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