2021 के न्यायालय के वो महत्वपूर्ण पांच फैसले, जो सुर्खियों में रहे

कोरोना महामारी के कारण जब पूरे देश में तरह-तरह के प्रतिबंध लागू थे, तब भी देश के न्यायालय अपने फैसले दे रहे थे। इनमें कई ऐसे फैसले भी दिए गए जो भविष्य में लैंड मार्क साबित होंगे।

वर्ष 2021 में कोरोना महामारी का असर हर क्षेत्र में देखने को मिला। इसके बावजूद सर्वोच्च न्यायालय ने कई महत्वपूर्ण फैसले दिए। इनमें कोरोना से बचाने के लिए कई ऐतिहासिक निर्देश थे, तो सामाजिक सरोकार वाले कई ऐसे फैसले भी थे, जिनका लंबे समय तक हमारे जीवन पर असर देखने को मिल सकता है।

ऐसे ही पांच मुख्य फैसलों पर डालते हैं एक नजर

सभी को जीवनसाथी चुनने का अधिकार
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में इस बात को स्पष्ट कर दिया कि अपनी पसंद का जीवन साथी चुनना कपल का अधिकार है। 11 फरवरी को न्यायालय ने इस तरह का फैसला देते हुए कहा कि समाज को अंतरजातीय और अंतर धर्म विवाह को स्वीकार करना सीखना होगा। उसे इस बात को लेकर किसी कपल को परेशान करने की अनुमति नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि शिक्षित युवा-युवती अपनी पसंद के लाइफ पार्टनर चुनते हैं और ऐसे मामले बढ़ रहे हैं। पुलिस प्रशासन का कर्तव्य है कि अगर कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है तो कपल को पूरी सुरक्षा दी जाए। सर्वोच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी कर्नाटक के एक कपल की याचिका पर सुनवाई के दौरान की थी। इसमें कपल ने अंतरजातीय विवाह किया था और लड़की के पिता ने केस दर्ज कराया था, जबकि कपल ने सुरक्षा के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।

एनडीए प्रवेश परीक्षा में महिलाओं की एंट्री
सर्वोच्च न्यायालय ने एनडीए प्रवेश परीक्षा में महिलाओं को बैठने की अनुमति दे दी। 22 सितंबर 2021 में अपने इस आदेश को वापस लेने से सर्वोच्च न्यायालय ने इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि आर्म्ड फोर्स इमरजेंसी की स्थिति को डील करने में सक्षम है। हम महिलाओं को एनडीए में प्रवेश एक वर्ष के लिए नहीं टाल सकते। न्यायालय ने केंद्र सरकार की उस दलील को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें सरकार ने कहा था कि महिलाओं को इस साल एनडीए एंट्रेस में बैठने की अनुमति वाले फैसले को सर्वोच्च न्यायालय वापस ले।

राष्ट्रीय भारतीय मिलिट्री स्कूल एक्जामिनेशन में बैठने की अनुमति
सर्वोच्च न्यायालय ने महिलाओं को एनडीए के बाद राष्ट्रीय भारतीय मिलिट्री स्कूल एक्जामिनेशन में बैठने की अनुमति भी दे दी ताकि उनका 2022 के सेशन में नामांकन हो सके। न्यायालय ने 7 अक्टूबर 2021 को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेजों में नामांकन के लिए परीक्षा में महिला उम्मीदवार को बैठने की अनुमति दे ताकि वे 2022 सेशन में प्रवेश ले सकें।

वैक्सीन की अलग-अलग कीमत पर सवाल
सर्वोच्च न्यायालय ने 31 मार्च 2021 को कहा कि पूरे देश के लिए एक समान कीमत वाली वैक्सीन पॉलिसी होनी चाहिए। न्यायालय ने केंद्र की वैक्सीन की कीमत को लेकर दोहरी नीति अपनाने पर सवाल उठाया था। उसके बाद जून 2021 को न्यायालय ने केंद्र सरकार से कुछ सवाल पूछे थे। न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा था कि वह बताए कि अभी तक वैक्सीनेशन के लिए कितने वैक्सीन किस-किस कंपनी से खरीदे। बाकी बचे लोगों का टीकाकरण कब तक हो जाएगा। न्यायालय ने कोरोना से संबंधित मामले की सुनवाई के बाद आदेश जारी करते हुए केंद्र सरकार से हलफनामे में पूरा ब्योरा मांगा था।

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स्कीन टू स्कीन टच जरुरी नहीं
सर्वोच्च न्यायालय ने बॉम्बे उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि पोक्सो के तहत अपराध के लिए स्कीन टू स्कीन टच होना जरुरी है। उच्च न्यायाल के इस फैसले पर काफी विवाद हुआ था और सर्वोच्च न्यायालय में इस फैसले को लेकर याचिका दायर की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय ने 18 नवंबर को उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज करते हए टिप्पणी की कि अगर कोई, किसी बच्चे को सेक्सुअल मंशे से टच करता है तो पोक्सो के तहत वह सेंक्सुअल असॉल्ट का अपराध होगा, इसके लिए स्किन टू स्किन टच होना जरुरी नहीं है। बॉम्बे उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने कहा था कि पोक्सो के तहत तब तक अपराध नहीं होगा, जब तक कि बच्चे के साथ स्कीन टू स्किन टच न हो। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पोक्सो एक्ट के तहत स्किन टू स्किन टच को अगर अनिवार्य किया जाए तो फिर इस कानून का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा। बच्चों को सेक्सुअल ऑफेंस से बचाने के लिए ही पोक्सो एक्ट बनाया गया है।

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