विवा समूह प्रकरण : उस एक भंगारवाले को ढूंढ रही ईडी!

पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक घोटाले के मामले में प्रवीण राऊत से संलग्न लोगों की जांच की जा रही है। इसी सिलसिले में प्रवीण राऊत की पत्नी और संजय राऊत की पत्नी के बीच भी आर्थिक व्यवहार की जांच चल रही है।

ठाकुर के कुनबे को तलाशने गई ईडी को अब एक भंगारवाले की तलाश है। इस भंगारवाले को 300 रुपए लेकर ढूंढा जा रहा है। खबर है कि उसी के पास पालघर के ‘ठाकुर’ कंपनी की विवा समूह की पूरी कुंडली कैद है।

पालघर जिले की राजनीति और उद्योग धंधे में ठाकुर का सिक्का चलता है। राजनीति में इस परिवार के अलावा कोई पर्याय नहीं है तो यहां उद्योग धंधे स्थापित करने के लिए सिंगल विंडो अप्रूवल भी जिले के ठाकुर ही हैं। कहते हैं ठाकुर परिवार की संपत्ति कितने की है ये तो ठाकुर भी नहीं जानते। लेकिन हर जंगल में एक वॉटर होल होता है जहां आसानी से किसी का भी शिकार किया जा सकता है। वैसे ही ठाकुर की भी कमजोर कड़ी अब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) के हाथ लगने की आशा जग गई है। जिसकी खोज में वो उस लैपटॉप को तलाश रही है जिसमें ठाकुर के कुनबे की पूरी कमाई का लेखजोखा है।

इस खबर को मराठी में पढ़ें – ३०० रुपयांचा लॅपटॉप ठाकुरांचे गुपित उलगडणार!

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भंगारवाले के हाथ चाबी

प्रवर्तन निदेशालय ने विवा समूह पर 22 जनवरी, 2021 को छापा मारा था। इस कार्रवाई के दूसरे दिन अर्थात 23 जनवरी को ईडी ने विवा समूह के व्यवस्थापकीय संचालक मेहुल ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया था। इसके अलावा समूह के लेखपाल (सीए) मदन गोपाल चतु्र्वेदी को भी गिरफ्तार किया गया है। मदन चतुर्वेदी से पूछताछ में सामने आया कि उसने अपना लैपटॉप एक भंगारवाले को 300 रुपए में बेच दिया था। इस लैपटॉप में विवा समूह और ठाकुर की पूरी मालमत्ता की जानकारी मिल सकती है। जिसके कारण ईडी अब उस भंगारवाले को तलाश रही है जिसे लैपटॉप बेचा गया था। ईडी के सहसंचालक सत्यब्रत कुमार ने बताया कि उस लैटपॉप में महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती है। गिरफ्तार किये गए मेहुल ठाकुर और मदन चतुर्वेदी को न्यायालय में पेश किया गया था जहां दोनों को 30 जनवरी तक ईडी की कस्टडी में रखने का आदेश दिया है।

ईडी के निशाने पर क्यों आया ‘विवा’ समूह

पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक में हुए घोटाले के मामले में ईडी जांच कर रही है। इस प्रकरण में आरोपी प्रवीण राऊत, विवा समूह के मालिकों का पारिवारिक मित्र है। ईडी की जांच में प्रवीण राऊत और विवा समूह के मध्य कुछ अर्थिक व्यवहार मिले हैं। आरोप है कि इस मामले में 5-6 करोड़ की मनी लॉड्रिंग हुई है जिसे विवा समूह में निवेश किया गया है। जिसके जांच के अंतर्गत ही ईडी ने विवा समूह पर छापा मारा है।

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