दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत पर निर्णय सुरक्षित, इस तिथि को आएगा फैसला

13 जून को न्यायालय ने सत्येन्द्र जैन को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। सत्येन्द्र जैन को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लांड्रिंग के आरोपित और दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। स्पेशल जज गीतांजलि गोयल ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट 18 जून को जमानत अर्जी पर फैसला सुनाएगा।

सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से वकील एन हरिहरन ने कहा कि सत्येंद्र जैन के खिलाफ जो भी साक्ष्य हैं, वे दस्तावेजी हैं और उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सत्येंद्र जैन दिल्ली सरकार के मंत्री हैं और उनके भागने की कोई संभावना नहीं है। किसी भी गवाह ने कभी भी सत्येंद्र जैन से अपने पर किसी भी खतरे की आशंका नहीं जताई है। हरिहरन ने कहा कि सत्येंद्र जैन जांच में सहयोग कर रहे हैं। वे ईडी के बुलावे पर सात बार पेश हो चुके हैं, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए।

ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने कहा कि ईडी लाला शेर सिंह ट्रस्ट से पैसों के लेनदेन की जांच कर रही है। दो या तीन लोगों ने कोलकाता में तीन-चार एकामोडेशन एंट्री की है। उन्होंने अपने अकाउंटेंट जेपी मोहता के दफ्तर में बैठक कर कहा कि हवाला के जरिये रकम जाएगी। 17 करोड़ रुपये की एकामोडेशन एंट्री का पता चला है। अभी जांच में और पता चलेगा। कोई भी मुफ्त में एकामोडेशन एंट्री नहीं करता है। कमीशन लिया जाता है। इसलिए अगर जमानत दी गई तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना है।

13 जून को कोर्ट ने सत्येन्द्र जैन को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। सत्येन्द्र जैन को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था। जैन की पेशी के दौरान ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि कैश दिल्ली में दिया गया। ये कैश कोलकाता में हवाला के जरिये एंट्री ऑपरेटर्स तक पहुंचा। ये एंट्री ऑपरेटर्स कंपनियों में शेयर खरीद कर निवेश करते थे। ये फर्जी कंपनियां थीं। इन फर्जी कंपनियों में निवेश कर काला धन को सफेद बनाया जा रहा था। पैसों से जमीन खरीदने का काम किया गया। प्रयास नामक एनजीओ के जरिये कृषि भूमि खरीदी गई। मेहता ने कहा था कि ईडी ने उन्हें जांच के लिए बुलाया लेकिन उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। मेहता ने कहा था कि हमें ये पता लगाना है कि पैसा किसी और का लगा था कि नहीं, इस पैसे से किसको लाभ हुआ, इसका पता लगाना है। उन्होंने कहा था कि ये मामला केवल 4.81 करोड़ का ही नहीं है।

सत्येन्द्र जैन की ओर से वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने कहा था कि सत्येन्द्र जैन जांच में लगातार सहयोग कर रहे हैं। हरिहरन ने कहा था कि ईडी जो दलीलें दे रहा है वो 2017 में दाखिल चार्जशीट का दोहराव मात्र है। उस केस में एक इंच आगे नहीं बढ़ा गया है। पांच-छह बार सत्येन्द्र जैन को बुलाया गया और वे जांच में शामिल हुए। हरिहरन ने कहा था कि सह-आरोपित कुछ भी कर सकता है। उसके लिए आरोपित जिम्मेदार नहीं है। सीबीआई जांच में भी आय के स्रोत का पता नहीं लगाया गया। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि आरोपित का पैसा हवाला के जरिये गया। सत्येन्द्र जैन के घर पर दो बार छापा डाला गया। उनका बैंक खाता सीज किया गया। हरिहरन ने कहा था कि सत्येन्द्र जैन ने मंत्री बनने के बाद सभी कंपनियों से इस्तीफा दे दिया था। ईडी के पास जांच करने के लिए सब कुछ है।

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