मेरठ पुलिस की साइबर सेल ने लोगों को इस बात के लिए किया सचेत!

साइबर ठग लोगों को फोन कर दूरसंचार कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए पूछते हैं कि आपके नेटवर्क में किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं आ रही है।

प्रतिदिन साइबर अपराधी बैंक खातों में सेंधमारी के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। मेरठ पुलिस की साइबर सेल ने साइबर ठगों की जालसाजी से बचने के लिए लोगों से जागरूक रहने और सतर्क रहने की अपील की है।

यह भी पढे-ममता के दिल्ली दौरे पर भाजपा ने कसा तंज, राष्ट्रपति चुनाव को लेकर कही ये बात

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रभाकर चौधरी के अनुसार, अतिरिक्त सतर्कता ही बचाव का एकमात्र उपाय है। साइबर ठग लोगों को फोन कर दूरसंचार कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए पूछते हैं कि आपके नेटवर्क में किसी तरह की कोई परेशानी तो नहीं आ रही है। इसके बाद साइबर अपराधियों द्वारा उपयोगकर्ता को विश्वास दिया जाता है कि उन्हें किसी तरह की ओटीपी या पिन बताने की आवश्यकता नहीं है। जिन उपभोक्ताओं द्वारा खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या बताई जाती है तो इसका फ़ायदा साइबर जालसाज उठाते हैं। समस्या के समाधान के लिए उनसे बताते हैं कि एक स्पेशल कोड डायल करने पर खराब नेटवर्क की समस्या दूर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि दरअसल स्पेशल कोड डायल करते ही उपयोगकर्ता की सभी कॉल साइबर ठगों के नंबर पर डायवर्ट हो जाती है, जिसका फायदा उठाकर साइबर ठग, उपयोगकर्ता के वाट्सऐप को अपने फोन में लॉगिन करके उपयोगकर्ता के नम्बर का दुरुपयोग कर उनके परिचितों से पैसे मांगते हैं। चूंकि उपयोगकर्ता के परिचितों को वाट्सऐप पर जो नम्बर शो होता है, वह असली होता है। इसलिए लोगों को लगता है कि उनका परिचित ही पैसा मांग रहा है और मांगी गई रकम साइबर ठगों के अकाउंट में ट्रांसफर हो जाती हैं ।

ऐसे करते हैं वाट्सऐप हैक
साइबर सेल के अनुसार, वाट्सऐप अकाउंट को वेरिफाई करने के लिए दो विकल्प होते हैं। एक ओटीपी के जरिए और दूसरा कॉल के जरिए अकाउंट वेरिफाई किया जाता है। चूंकि सभी कॉल साइबर ठग के मोबाइल नंबर पर डायवर्ट रहती है, इसलिए साइबर ठग कॉल विकल्प को सेलेक्ट करता है दूसरे के वाट्सऐप को अपने फोन में लॉगिन करके उस अकाउंट में मौजूद वाट्एप ग्रुप और नंबरों को मैसेज करके पैसे की मांग करता है। परिचित नम्बर देखकर लोग जांच पड़ताल नहीं करते और झांसे में आकर खाते में रकम ट्रांसफर कर देते हैं। इसलिए अपने वाट्सऐप अकाउंट में टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें, ताकि ओटीपी आने पर भी कोई लॉगिन न कर सके। किसी भी अनजान कॉल करने वाले का काल आने पर किसी को भी ओटीपी शेयर न करें या स्पेशल कोड अपने मोबाईल में डायल न करें तथा ऐनिडेस्क टीम, टीम व्यूवर, क्विक सपोर्ट आदि ऐप डाउनलोड न करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here