मुख्यधारा से जुड़ गए मदरसे!

असम सरकार अप्रैल 2021 से सरकारी मदरसों को बंद कर उन्हें सरकारी स्कूल में बदलने संबंधी विधेयक 27 दिसंबर को पेश किया था। जिसे 30 दिसंबर 2020 को पारित कर दिया गया

असम विधानसभा में सरकार द्वारा संचालित सभी मदरसों को बंद करने का विधेयक 30 दिसंबर को पारित कर दिया गया। अब उन्हें आम स्कूल में बदल दिया जाएगा। विधानसभा स्पीकर ने इसकी घोषणा की। उसके बाद विपक्षी दलों कांग्रेस और एआईयूडीएफ के विधायको ने वॉकआउट कर दिया।

बता दें कि असम सरकार अप्रैल 2021 से सरकारी मदरसों को बंद कर उन्हें सरकारी स्कूल में बदलने संबंधी विधेयक 27 दिसंबर को पेश किया था। जिसे 30 दिसंबर 2020 को पारित कर दिया गया।

विपक्ष की आपत्ति के बावजूद विधेयक पेश
विपक्ष की आपत्ति के बावजूद शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने विधानसभा के तीन दिसवसीय सत्र में विधानसभा सत्र के पहले दिन यह विधेयक पेश किया था। सरमा ने कहा कि ये विधेयक निजी मदरसों पर नियंत्रण और उनको बंद करने के लिए नहीं है। बल्कि सरकारी मदरसो को स्कूल में बदलकर बच्चों को आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा देने के उद्देश्य से ये विधेयक पारित किया गया है।

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संस्कृत स्कूलों को भी किया जाना है शामिल
विधानसभा में लाए गए विधेयक में संस्कृत स्कूलों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। शिक्षा मंत्री ने भी इस बारे में कोई बात नहीं कही। उन्होंने कहा कि सभी मदरसों को उच्च प्राथमिक, उच्च और माध्यमिक स्कूलों में बदला जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक तथा गैर शिक्षण कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों मे कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। बता दें की असम में सरकार संचालित कुल 610 मदरसे हैं। इनपर सरकार हर वर्ष 610 करोड़ रुपए खर्च करती है। संस्कृत पाठाशालाओं को भी मुख्यधारा के स्कूली शिक्षा में लाने की योजना है।

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