वो करता था मानव हड्डियों की तस्करी… जानिए पूरी कहानी

इतनी बड़ी तायदाद में मानव हड्डियों की बरामदगी से सुरक्षा बल के जवान भी हैरान रह गए। सीमा की पिलर संख्या 339 के पास से उसकी गिरफ्तारी की गई

भारत-नेपाल बॉर्डर पर तैनात एसएसबी 20वीं बटालियन के बसबिट्टा बीओपी के जवानों ने एक शख्स को मानव हड्डियों और खोपड़ियों के साथ गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक बैग से 48 छोटे-छोटे मानव शरीर की हड्डियों के साथ 22 खोपड़ी और 26 पैर की हड्डियां बरामद की गई हैं।

सुरक्षा बल के जवान भी रह गए हैरान
इतनी बड़ी तायदाद में मानव हड्डियों की बरामदगी से सुरक्षा बल के जवान भी हैरान रह गए। सीमा की पिलर संख्या 339 के पास से उसकी गिरफ्तारी की गई। एसएसबी कैंप के इन्चार्ज इंस्पेक्टर श्रीराम ने आरोपी को स्थानीय पुलिस थाने के हवाले कर दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी नेपाली नागरिक है और उसका नाम सोगारथ महतो है। वह नेपाल के डुमारिया थाना क्षेत्र के अंतर्गत आनेवाले सुदामा गांव का रहनेवाला है।

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बांसुरी और बीन बनाने के लिए हड्डियों की तस्करी
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह इन हड्डियों को नेपाल में तस्करी के लिए ले जाना चाहता था। ये हड्डियां उसने पटना के महात्मा गांधी सेतु के नीचे गंगा नदी के किनारे के श्मशान से जमा की थीं। वह इन हड्डियों को काठमांडू में एक व्यापारी को बेचने के लिए ले जा रहा था। उसने बताया कि मानव हड्डियों का इस्तेमाल बांसुरी और बीन जैसे वाद्य यंत्र बनाने के साथ ही तांत्रिक प्रयोजन के लिए किया जाता है। ऐसे वाद्य यंत्रों की विदेश में काफी मांग है।

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एफआईआर दर्ज
मेरजगंज थाने के प्रभारी राजदेव प्रसाद ने बताया कि एसएसबी के एसआई प्रेम सिंह के लिखित बयान पर तस्कर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले की जांच एसआई परशुराम गुप्ता को सौंपी गई है। फिलहाल गिरफ्तार तस्कर को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि हड़्डियों की जांच के लिए फॉरेंसिक लैब मुजफ्फपुर भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद इस बारे में ज्यादा जानकारी मिल पाएगी।

कहीं निठारी जैसा कोई मामला तो नहीं?
तस्कर के बयान पर यकीन करें तो यह माना जाना चाहिए कि वह इन हड्डियों की तस्करी बांसुरी और अन्य तरह के वाद्य यंत्र बनाने के लिए कर रहा था। लेकिन 2006 में दिल्ली के पास निठारी कांड को कोई भूल नहीं सकता। वहां कई मासूमों के साथ दरिंदगी की गई गई थी और उनकी हत्या कर वहीं दफन कर दिया गया था। वे लोग आज भी उस घटना को याद कर अपने आंसू नहीं रोक पाते, जिनके बच्चों के कंकाल कोठी के पीछे मिले थे।

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