शव गृह में लावारिस पड़ा था, देखा तो मेरा बेटा ही था… पत्रकार रमन के पिता

लखीमपुर खीरी कांड राजनीतिक हथकंडों का सूत्रधार हो गया है। परंतु, एक पत्रकार की मौत पर चिल्लानेवाला कोई नहीं है, यहां तक की वह पत्रकार भी चुप हैं जो उसके साथ प्रतिदिन रहते थे।

लखीमपुर खीरी में 3 तारीख को हुई घटना में 8 लोगों की जान चली गई। कांग्रेस, सपा, बसपा और किसान यूनियन के नेता पहुंचने के लिए एक से एक हथकंडे अपना रहे हैं, पुलिस प्रशासन प्रकरण को शांत करने की जी तोड़ कोशिश में है। इस बीच एक और परिवार है जो इस प्रकरण के बाद बेसुध पड़ा है… ये है पत्रकार रमन कश्यप का परिवार। रमन इस घटना में जान गंवानेवाले 8 लोगों में शामिल हैं, वह मीडिया कवरेज करने गए थे परंतु लौटे तो बेजान शरीर में। पिता के सामने उस रात पहली बार जब रमन आया तो लावारिस स्थिति में शव गृह में पड़ा हुआ।

पत्रकार रमन कश्यप का उल्लेख कोई नहीं कर रहा, उसकी मौत से न संयुक्त किसान यूनियन के राकेश टिकैत को लाभ है और न ही कांग्रेसी गांधी परिवार, अखिलेश यादव और बसपा नेताओं को कुछ मिलनेवाला है। सत्ताधारी दल भी चुनावी राज्य में अपनी साख बचाने में व्यस्त है, वैसे भी एक साधारण पत्रकार की मौत पर मातम तो उसका परिवार ही मनाता रहा है। पिता राम दुलारे कश्यप का दर्द आंखों से छलकता रहता है। वे कहते हैं, हमें तो रमन की सूचना भी 12 घंटे बाद मिली। रमन घर से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का कार्यक्रम कवर करने गया था। परंतु, वहां दोपहर 3 से 3.30 बजे के लगभग यह घटना घट गई।

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वो तिरछा पड़ा था
रमन जब रात तक वापस घर नहीं लौटा तो परिवारजनों को चिंता होने लगी। यहां-वहां फोन करने पर लोगों ने बताया कि जिस कार्यक्रम में रमन गया था वहां आठ लोगों की मौत हो गई है। घरवाले परेशान हो उठे, इतने में तिकोनिया पुलिस थाने के कोतवाल ने 3 बजे रमन के मित्र से कहा कि एक शव की पहचान नहीं हो पा रही है। जिसके बाद पिता राम दुलारे परिवार के साथ लखीमपुर खीरी शव गृह पहुंचे। वहां एक शव तिरछा लावारिस स्थिति में पड़ा था। उन्होंने कपड़े देखे तो रमन के थे। बिलखते हुए वे कहते हैं, मेरे बेटे को इलाज नहीं मिला, उसे तिकोनिया या निंघासन के अस्पताल ले जाया गया होता तो शायद मेरा बेटा जीवित होता।

पत्रकार भी नहीं बताए
राम दुलारे कश्यप कहते हैं, यह घटना दिन में 3 बजे घटी। यहां के सारे पत्रकार साथ में ही गए थे परंतु, किसी ने हमें नहीं बताया कि ऐसा हुआ है। हमें तो बारह घंटे बाद सूचना मिली… इतना कहकर वे रोने लगे। रमन के परिवार में पिता, पत्नी एक बारह वर्ष की बेटी, ढाई साल का बेटा और दो भाई हैं।

प्रशासन से मिला है आश्वासन
रमन के पिता से प्रशासन की ओर से एसडीएम मिले हैं। राम दुलारे कश्यप बताते हैं कि एसडीएम ने आश्वस्त किया है कि, जो सहायता सरकार ने सभी के लिए घोषित की है, वह रमन के परिवार को भी दी जाएगी। इसके अलावा भी प्रशासन सहायता दिलाने की कोशिश करेगा।

पीड़ितों को उत्तर प्रदेश सरकार की सहायता
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने लखीमपुर खीरी घटना में मारे गए सभी लोगों को 45 लाख रुपए नकद, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी का आश्वासन दिया है। सरकारी आश्वासन के अनुसार रमन के परिवार को भी यह मदद मिलेगी।

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