अधिकारियों को जेल भेजने से मरीजों को नहीं मिलेगी ऑक्सीजन! केंद्र को सर्वोच्च राहत

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के मामले में केंद्र को बड़ी राहत दे दी है। न्यायालय ने टिप्पणी की है कि ऑक्सीजन आपूर्ति की निगरानी करने वाले अधिकारियों को जेल भेजने से मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल जाएगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने के मामले में केंद्र को बड़ी राहत दे दी है। न्यायालय ने टिप्पणी की है कि ऑक्सीजन आपूर्ति की निगरानी करने वाले अधिकारियों को जेल भेजने से मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल जाएगी। इसी टिप्पणी के साथ न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है।

बता दें कि दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में ऑक्सीजन सप्लाई की कमी के मुद्दे पर अधिकारियों को न्यायालय में तलब किए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश से राहत के लिए केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इसी मामले में ये टिप्पणी करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर स्टे दे दिया है। उच्च न्यायालय ने दिल्ली समेत सभी राज्यों को किए जाने वाले ऑक्सीजन सप्लाई की निगरानी कर रहे अधिकारियों से मामले की सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने को कहा था।

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सरकार ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण
इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस बारे में कहा था कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि न्यायालय ने अवमानना की प्रक्रिया शुरू की है। जबकि केंद्र और सभी अधिकारी इस मामले में बेहतर काम कर रहे हैं। मेहता ने मामला सीजेआई रमना के सामने रखा था। सीजेआई ने कहा था कि इस मामले को जस्टिस चंद्रचूड़ की पीठ देखेगी।

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जस्टिस चंद्रचूड़ ने की मुंबई मनपा की प्रशंसा
जस्टिस चंद्रचूड़ ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि हम मीडिया में जो देखते हैं, उससे पता चलता है कि मुंबई महानगरपलिका ने ऑक्सीजन आपूर्ति के मामले में कई उल्लेखनीय काम किए हैं। ऐसा कहते हुए हम दिल्ली का अपमान नहीं करना चाहते लेकिन यहां की सरकार मुंबई मनपा से कुछ सीख सकती है। हालांकि उन्होंने कहा कि ये देखना होगा कि मुंबई महानगरपालिका ने इस बारे में क्या कदम उठाए हैं।

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