पुन: निस्संदेह-निर्विरोध… स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक समिति में सेवा-समर्पण और राष्ट्राभिमानी पदाधिकारियों को अवसर

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक देश कार्य में सतत कार्यशील है। इसके कार्यों के पीछे स्मारक के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसमें वीर सावरकर के पौत्र रणजीत सावरकर समेत सभी पदाधिकारी और सदस्यों का अभिन्न योगदान है।

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की सर्वसाधारण सभा 25 दिसंबर, 2022 को संपन्न हुई। इस बैठक में निर्विरोध निर्वाचित सदस्यों के नामों की घोषणा निर्वाचन अधिकारी संजय जोशी ने की। इस घोषणा के पश्चात कार्यकारिणी सदस्यों की एक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में पदाधिकारियों का चयन किया गया।

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की विद्यमान समिति के पदाधिकारियों ने अपने कार्यकाल में वीर सावरकर के विचारों का संपूर्ण सेवा समर्पण से प्रचार प्रसार करके अपने कार्यों का आदर्श खड़ा किया। इसे देखते हुए स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्नेहियों ने पुन: एक बार विद्यमान पदाधिकारी और कार्यकारिणी पर विश्वास व्यक्त किया। इसका सुखद परिणाम यह रहा कि, विद्यमान कार्यकारिणी के कंधों पर पुन: स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक का कार्यभार सौंपा गया।

नवनिर्वाचित कार्यकारिणी

  • अध्यक्ष –  प्रवीण दीक्षित
  • कार्याध्यक्ष – रणजीत सावरकर
  • कोषाध्यक्ष – मंजिरी मराठे
  • कार्यवाह – राजेंद्र वराडकर
  • सह कार्यवाह – स्वप्निल सावरकर

कार्यकारिणी सदस्य (आश्रयदाता विभाग) 

  • के. सरस्वती
  • विज्ञानेश शंकर मासावकर
  • अभय जोशी
  • कमलाकर गुरव

कार्यकारी सदस्य (सामान्य विभाग)

  • चंद्रशेखर साने (पुणे)
  • दीपक कानुलकर
  • डॉ.अमित नाबर
  • चिरायु पंडित (वडोदरा)
  • भाग्यश्री सावरकर (पुणे)

स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के निर्वाचित सदस्यों में सामान्य विभाग से दीपक कानुलकर, डॉ.अमित नाबर, चिरायु पंडित (वडोदरा) और भाग्यश्री सावरकर (पुणे) का समावेश है। स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की विद्यमान कार्यकारिणी के पदाधिकारियों में महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रवीण दीक्षित को दूसरी बार अध्यक्ष पद पर चुना गया है। स्मारक में पिछले 18 वर्षों से अपनी नि:स्वार्थ सेवाएं दे रहे स्वातंत्र्यवीर सावरकर के पौत्र रणजीत सावरकर को पुन: कार्याध्यक्ष पद की जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ही कोषाध्यक्ष पद पर मंजिरी मराठे, कार्यवाह पद पर राजेंद्र वराडकर और सह कार्यवाह पद पर स्वप्निल सावरकर का भी पुनर्चयन हुआ है। पदाधिकारियों में कार्याध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और कार्यवाह पिछले 18 वर्षों से स्मारक का कार्य कर रहे हैं। सेवा समर्पण और निष्ठा के इस काल में नए और युवा सदस्यों का साथ मिलता रहा है। इसका परिणाम है कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक सशक्त विचारों और हिंदुत्व के कार्यों का शक्तिशाली केंद्र है।

कार्यों से बढ़ाया स्मारक का मान

जो टकराया, वह मुंह की खाया
स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने जिस राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व अर्पण किया, उसी राष्ट्र में स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात उनके साथ बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया। यह षड्यंत्र वीर सावरकर के आत्मार्पण के बाद भी चलता रहा। परंतु, स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक की समिति ने इसका प्रबल विरोध करते हुए, षड्यंत्रकारियों से प्रमाणों के साथ लड़ाई छेड़ दी। सड़क से लेकर समाचार माध्यमों के मंच और न्यायालय तक इन द्रोहियों को चुनौती दी जा रही है।

गांधी परिवार की बोलती बंद
राहुल गांधी और सोनिया गांधी अपने राजनीतिक लाभ के लिए स्वातंत्र्यवीर सावरकर पर लगातार झूठे आरोप मढ़ते रहे हैं। ‘भारत जोड़ो’ यात्रा के बीच महाराष्ट्र के वाशिम जिले में राहुल गांधी ने फिर वीर सावरकर पर अशोभनीय टिप्पणी की, जिस पर पूरा महाराष्ट्र उठ खड़ा हुआ। स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के कार्याध्यक्ष रणजीत सावरकर ने नेहरू और गांधी द्वारा अंग्रेजों को दिये गए पत्र, नेहरू के माउंटबेटन की पत्नी एडविना से संबंध और भारत के विभाजन पर नेहरू द्वारा अकेले लिये गए निर्णय पर प्रमाणों के साथ प्रश्न पूछे। राहुल गांधी को बड़बोली का उत्तर महाराष्ट्र के कांग्रेस के सहयोगी दलों ने भी दिया और राहुल गांधी की बोलती बंद हो गई। सोनिया गांधी और राहुल गांधी द्वारा वीर सावरकर के विरुद्ध किये जा रहे दुष्प्रचार के लिए स्मारक समिति ने न्यायालयीन लड़ाई भी आरंभ कर दी है।

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झुक गया ‘द वीक’, माफी मांगा एबीपी
‘द वीक’ नामक पत्रिका ने गलत लेख छापने का बड़ा दंड भुगतने के पहले ही घुटने टेक दिये। सार्वजनिक रूप से अपने कृत्य माफी मांग ली। मराठी समाचार चैनल ‘एबीपी माझा’ ने 28 मई 2018 को वीर सावरकर के अवमानकारी कार्यक्रम का प्रसारण किया। इसका प्रबल विरोध रणजीत सावरकर और पूरी स्मारक समिति ने किया। सड़क से लेकर मीडिया के मंचों तक ‘एबीपी माझा’ के विरुद्ध आक्रोष उमड़ा। कानूनी रूप से कार्रवाई के कदम बढ़ाए गए। इस चैनल को वीर सावरकर स्नेहियों के बहिष्कार का ऐसा झटका लगा कि, चैनल के संपादक राजीव खांडेकर ने माफी मांगी।

स्वातंत्र्यवीर के विचार के साथ उनसे संबंधित भूमि का संरक्षण

भगूर में वीर सावरकर की जन्मस्थली का संवर्धन
नासिक जिले के भगूर में स्थित स्वातंत्र्यवीर सावरकर की जन्मस्थली उनके जीवन का इतिहास समेटे हुए है। इसके संवर्धन का कार्य महाराष्ट्र सरकार से स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक ने अपने कंधों पर ले लिया।

मार्सेलिस में स्वातंत्र्यवीर सावरकर की मूर्ति स्थापना
फ्रांस के मार्सेलिस सागर में स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने ऐतिहासिक छलांग लगाई थी। भारतीय स्वातंत्रता के महायुद्ध काल के इस स्वर्णिम इतिहास को नई पीढ़ी के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए मार्सेलिस में स्वातंत्र्यवीर सावरकर की मूर्ति स्थापन का प्रयत्न अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस कार्य में स्मारक के प्रयत्नों का साथ महाराष्ट्र विधान सभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर दे रहे हैं। इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भी चर्चा हुआ और केंद्रीय सरकार इस कार्य में स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक के साथ है।

रत्नागिरी कारागृह में स्मृति दालान
अंदमान से लौटने के बाद स्वातंत्र्यवीर सावरकर को रत्नागिरी कारागृह में बंदी बनाकर रखा गया था। उस बंदीगृह को स्मृति दालान के रूप में विकसित करके 28 मई, 2018 को जनहितार्थ समर्पित किया गया। रत्नागिरी, स्वातंत्र्यवीर सावरकर की कारागृह यातना, स्थानबद्धता और सामाजिक कार्यों का ऐतिहासिक प्रमाण है।

जो सच, उसी के दर्पण – मीडिया में पदार्पण

वीर सावरकर स्टूडियो और साऊंड स्टूडियो का आरंभ
कोरोना काल में विश्व घरों में कैद था, परंतु इसी काल में स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक में ऑडियो और वीडियो स्टूडियो को आकार दिया गया। यह स्टूडियो स्मारक के समाचार माध्यम के लिए उपयोगी है, इसके साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी सहायक बन गया है।

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समाचार समूह का आरंभ
वीर सावरकर ऑडियो और वीडियो स्टूडियो के साथ ही ‘हिंदुस्थान पोस्ट’ नामक मीडिया हाऊस का भी प्रारंभ हुआ। जिसमें हिंदुस्थान पोस्ट हिंदी और मराठी वेब पोर्टल और साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन किया जाता है। अक्टूबर 2020 से वर्तमान काल तक एक करोड़ से अधिक व्यूज के साथ समाचार पोर्टल राष्ट्रनिष्ठ और तथ्यपरक समाचारों का आधार बन गया है।

ज्ञान-विज्ञान और राष्ट्र निष्ठा का प्रतीक

लद्दाख में पर्वतारोहण प्रशिक्षण संस्था
भारत चीन की सीमा पर जब युद्ध की परिस्थिति उत्पन्न थी, उस समय वीर सावरकर माऊंटेनियरिंग इन्स्टिट्यूट ऑफ रिसर्च एण्ड रेस्क्यू प्रकल्प की शुरुआत का कार्य आगे बढ़ाया। इसका कार्य 27 अक्टूबर 2019 से शुरू है। कोरोना के कारण कार्य में विलंब हुआ लेकिन, यह शीघ्रता से पूर्ण होगा इसका प्रयत्न चल रहा है।

‘हे मृंत्युजय’ का मंचन
वामपंथियों के गढ़ दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में ‘हे मृंत्युजय’ नाटक का दो बार सफलता से मंचन किया गया। इस मंचन का प्रभाव ऐसा हुआ कि, राष्ट्र निष्ठ छात्र और कर्मचारियों का बड़ा संगठित हो गया और विश्वविद्यलाय की एक सड़का नाम स्वातंत्र्यवीर सावरकर पर रखा गया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में भी ‘हे मृंत्युजय’ का सफल मंचन किया गया। इसके माध्यम से लाखो छात्रों तक स्वातंत्र्यवीर के विचार, उनका समर्पण और कार्य पहुंचा।
कारागृह में सजा भुगत रहे बंदियों के जीवन में राष्ट्र प्रेम और निष्ठा जागृत करने के उद्देश्य से नासिक कारागृह में हजारों बंदियों को ‘हे मृंत्युजय’ का मंचन दिखाया गया।

हमारे वीर, हमारे सम्मान
स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक द्वारा शौर्य पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इसके अलावा विज्ञान पुरस्कार, शिखर सावरकर पुरस्कार प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार हमारे वीरों और हमारे सम्मान के प्रतीकों का मनोबल ऊंचा करने के उद्देश्य से किया जाता है।

प्रेरणास्थल है स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक

खेलों में सम्मान
मुंबई के दादर स्थित स्वातंत्र्यवीर सवारकर राष्ट्रीय स्मारक, शिक्षा, क्रीडा, शारीरिक विकास और राष्ट्र निष्ठा का प्रेरणा स्थल है। स्मारक में राइफल शूटिंग, बॉक्सिंग, योग समेत तीस से अधिक गतिविधियां संचालित होती हैं। वीर सावरकर संस्थान से प्रशीक्षित विभिन्न खिलाड़ियों ने अपने अपने क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक अर्जित किये।

दक्ष अधिकारी बनें, राष्ट्र सेवा करें
स्वातंत्र्यवीर सावरकर राष्ट्रीय स्मारक में यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (यूपीएससी) और महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन (एमपीएससी), नेशनल डिफेन्स अकादमी (एनडीए) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्ठावान छात्रों को मार्गदर्शन के लिए कक्षाएं संचालित की जाती हैं। इसका उद्देश्य देश की बागडोर संभालनेवाले अधिकारियों में निष्ठावान और राष्ट्राभिमानी युवकों को अवसर दिलाना है।

स्वतंत्रता की संघर्ष गाथा
स्वातंत्र्यवीर सावरकर के जीवन संघर्षों का प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है, राष्ट्रीय स्मारक में संचालित होनेवाला लाईट एंड साऊंड शो। यह शो नि:शुल्क रूप से सप्ताहांत के दिनों में संचालित किया जाता है।

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