वाह रे गुजरात मॉडल! कूड़े की गाड़ी में ढो रहे वेंटिलेटर… जानें मरीजों का क्या होगा हाल?

गुजरात में कोविड-19 को लेकर लापरवाही की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसमें एक प्रकरण राजकोट का सामने आया था जिसमें अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए लेबोरेटरी के कर्मियों ने खाली टेस्ट किट ही भेज दिये। जिससे निगेटिव रिपोर्ट प्राप्त हो सकें।

कोविड-19 का संक्रमण तेजी से जनमानस को अपने घेरेबंदी में ले रहा है। देश में आठ प्रदेश ऐसे हैं जहां से 60 प्रतिशत कोविड-19 संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। इन प्रदेशों में गुजरात का नाम भी है। जब संक्रमण बढ़ रहा है तो राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं की आवश्यकताएं भी बढ़ी हैं। इस बीच सूरत से परेशान करनेवाली लापरवाही सामने आई है। जहां वेंटिलेटर को कूड़े की गाड़ी पर लाद दिया गया। यदि वेंटिलेटर की यह स्थिति है तो उस पर इलाज करवाने वाले मरीज और आईसीयू में संक्रमण की दशा और खराब हो जाएगी।

वाह रे गुजरात मॉडल… लापरवाही की ऐसी सूरत देखकर सहसा मुंह से यही निकल पड़ता है। जिसकी प्रगति को देखकर कभी चीन के राष्ट्रपति तो कभी अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष गुजरात पहुंचे और साबरमती नदी के किनारे बैठकर प्रगति के झूले को समझा, आज उस राज्य में स्वास्थ्य विभाग की संवेदना कूड़ेदान में है और कूड़े की गाड़ी पर कोरोना संक्रमितों के लिए भेजे गए वेंटिलेटर। इस लापरवाही की क्षति उन संक्रमितों को उठानी पड़ सकती है जिनके जीवन की डोर इस अप्राकृतिक संसाधन पर निर्भर होगी।

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ये है प्रकरण
कोविड संक्रमितों की बढ़ रही संख्या के कारण सूरत के सरकारी अस्पताल में वेंटिलेटर की कमी पड़ गई है। इसे देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने वलसाड से 34 वेंटिलेटर सूरत भेजने का निर्देश दिया था। इन वेंटिलेटरों को ढोकर लाने के लिए सूरत महानगर पालिका ने अपना कूड़ा ढोनेवाला ट्रैक्टर भेज दिया था।

वैसे ये वेंटिलेटर्स एक तो कूड़े की गाड़ियों में लदे थे और दूसरे खुले ही थे। जिससे उनमें संक्रमण पनपने का खतरा कई गुना अधिक है। इस मुद्दे पर सूरत सरकारी अस्पताल का भी कहना यह था कि तत्काल अवश्यकता थी इसलिए इन कू़ड़ा ढोनेवाले ट्रैक्टरों को भेज दिया है।

जिलाधिकारी का पक्ष

सूरत से जो वाहन आए थे प्रशासन ने उन्हीं वाहनों में वेटिंलेटर्स को भेज दिया। इस प्रकरण के जांच के आदेश दिये गए हैं।
आर.आर रावल – जिलाधिकारी, वलसाड

इस मामले में गुजरात के संजान में अस्पताल चला रहे डॉक्टर से जब पूछा गया तो उन्होंने इस पर आश्चर्य व्यक्त किया।

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ये मेडिकल एथिक्स के विरुद्ध है। वेंटिलेटर को व्यवस्थित पैकिंग के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता। उसको ढोनेवाले वाहनों को भी स्वच्छ रखना आवश्यक है। कूड़े की गाड़ियों से वेंटिलेटर ढोने से उसका निर्जंतुकिकरण संभव नहीं हो पाएगा। इसके कारण पहले से ही संक्रमित और सीरियस मरीज को इन्फेक्शन होना स्वाभाविक है।
डॉ. आर.एम तिवारी

डॉक्टरों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सभी साजो सामान और दवाइयों को एक निश्चित तापमान पर रखना, स्वच्छ स्थान पर रखना आवश्यक होता है। लेकिन सूरत महानगर पालिका ने लापरवाही की सारी हदें पार कर दी हैं।

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