इन मांगों को लेकर हड़ताल पर महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टर्स!

अपनी कई मांगों को लेकर महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टर्स 1 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं।

महाराष्ट्र के रेजिडेंट डॉक्टर्स 1 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। उन्होंने अपनी कई मांगों को लेकर यह हड़ताल शुरू की है। इस दौरान ओपीडी सेवा बंद रखने की घोषणा की गई है। हड़ताल के दौरान इमरजेंसी सेवा उपलब्ध रहने से मरीजों को ज्यादा परेशानियों का सामना नहीं करने की खबरें मिल रही हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगें सरकार नहीं माने लेती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।

डॉक्टरों की हड़ताल का मुख्य कारण सरकार द्वारा कोरोना काल में शिक्षा शुल्क माफ करने का अपना वादा पूरा नहीं करना है। इसके साथ ही वे बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं होने से उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

वादे से मुकरने का आरोप
मार्ड के अध्यक्ष डॉक्टर डीडी पाटील का कहना है कि कुछ महीने पहले प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री अमित देशमुख ने कोरोना संकट में रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा की गई सेवा और उनकी शिक्षा में आई बाधा के कारण ट्यूशन फीस माफ करने का वादा किया था लेकिन अब वे अपने वादे को भूल गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से हम इस मुद्दे को सरकार के सामने उठा रहे हैं लेकिन किसी को भी हमारी परवाह नहीं है और वे कोई कदम उठाने को तैयार नहीं हैं।

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मार्ड की चेतावनी
डॉक्टर पाटील ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों के बारे में सरकार लिखित आश्वासन नहीं देती, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार हर बार केवल आश्वासन देकर काम चला लेती है, लेकिन इस बार उसे अपना आश्वासन पूरा करना ही होगा, क्योंकि कोरोना काल में हमने अपनी जान खतरे में डालकर मरीजों की सेवा की है।

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