रेलवे में ऐसों की खैर नहीं, प्रति तीन दिन में एक अधिकारी का विकेट डाउन

रेलवे के कामचोर और भ्रष्ट अधिकारियों के दिन अब लद गए हैं। नए युग में अब ऐसे अधिकारियों के सामने सुधरने और घर बैठने के अलावा कोई मार्ग नहीं बचा है।

भ्रष्टाचार और कामचोरी पर प्रहार चल रहा है। इस प्रक्रिया में रेलवे ने वर्ष 2021 से सफाई अभियान चलाया हुआ है। जिसमें पिछले 16 महीनों में 139 ने स्वसेवा मुक्ति ले ली जबकि, भ्रष्टाचार के आरोप में 38 अधिकारियों को हटा दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रेल विभाग में कार्य करो या सजा भुगतो, का काल चल रहा है। रेल मंत्री के अनुसार हम इस मंत्र पर बहुत ही स्पष्ट हैं। इसलिए जुलाई 2021 से प्रति तीन तीन दिन में एक अधिकारी पर कार्रवाई हो रही है। बुधवार को दो वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसमें से एक को हैदराबाद में सीबीआई ने पांच लाख रुपए लेते हुए और दूसरे को रांची में तीन लाख रुपए लेते हुए पकड़ा था। यह दोनों अधिकारी इलेक्ट्रिकल सिग्नलिंग, मेडिकल सिविल सर्विसेज पर्सनल, ट्राफिक और मैकेनिकल विभाग से संबंद्ध थे।

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फोर्स्ड रिटायरमेंट में घाटा ही घाटा
रेलवे में स्वसेवा मुक्ति नियम के अनुसार कर्मचारी की जितने वर्ष की सेवा बाकी होती है, उतने वर्ष में दो महीने का वेतन दिया जाता है। जबकि, फोर्स्ड रिटायरमेंट में यह सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। जुलाई 2021 मे रेल विभाग का प्रभार संभालने के बाद से ही रेल मंत्री चेतावनी देते रहे हैं कि, कार्य न करनेवाले स्वसेवा मुक्ति (वॉलंटरी रिटायरमेंट) लेकर घर बैठें।

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