ईसाई धर्म के प्रचार के लिए ऐसे किया जा रहा है पाठ्य पुस्तकों का इस्तेमाल!

बिहार में 5वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में ईसा मसीह का पाठ शामिल किया गया है। इस पाठ में अंधविश्वास फैलाने वाली जानकारी दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

बच्चों को बचपन से ही समुचित शिक्षा और जानकारी देना जरुरी है। लेकिन कई राज्यों की पाठ्य पुस्तकों में इस तरह के पाठ शामिल किए जाने की जानकारी मिलती रही है, जिन्हें पढ़ने के बाद बच्चों के कोमल मन मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे ही बच्चों को दिग्भ्रमित करने वाले पाठ बिहार की पाठ्यपुस्तक में शामिल किए जाने का पर्दाफाश होने के बाद हड़कंप मच गया है। यहां 5वीं कक्षा की पाठ्यपुस्तक में ईसा मसीह का पाठ शामिल किया गया है। इस पाठ में अंधविश्वास फैलाने वाली जानकारी दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस बात को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा गरम है।

बच्चों को प्रभावित करने की कोशिश
एक तरफ राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा बोर्ड पाठ्यक्रम में सुधार किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य स्तरीय शिक्षा बोर्डों में भी सुधार करने की जरुरत है। शिक्षा बोर्ड, बिहार के राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की 5वीं कक्षा की ब्लॉसम पार्ट-4 में पांचवीं कक्षा के छात्रों की पुस्तक में ईसा मसीह से संबंधित पाठ ‘यीशु टू सुपर’ दिया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे एक परिवार ईसा मसीह से मिलने के लिए परेशान है? वह कैसे उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करता है। इस तरह का पाठ देकर ईसाई धर्म का प्रचार किया जा रहा है।

पाठ्यक्रम बदलने की मांग
पिछले कई दशकों से, चाहे केंद्रीय शिक्षा बोर्ड हो या राज्यस्तरीय शिक्षा बोर्ड हो, पाठ्यक्रम में कई झूठा इतिहास पढ़ाया जा रहा है। इसके साथ ही इनमें राष्ट्रीय नायकों और महापुरुषों का अपमान करने वाले पाठ शामिल किए गए हैं। लेकिन अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने हाल ही में कॉलेजों में पढ़ाए जा रहे इतिहास की पाठ्यपुस्तकों से मुगलों और विदेशी आक्रमणकारियों के इतिहास को हटाने और भारत के शक्तिशाली राजाओं के इतिहास को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसी तरह, एनसीईआरटी ने भी पाठ्यक्रम में संशोधन किया है और अब इतिहास की किताब में छत्रपति शिवाजी महाराज का विस्तृत इतिहास दिया गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा बोर्ड ने भी इतिहास की किताब से रानी लक्ष्मीबाई के अपमान के पाठ को हटा दिया है। इसी कड़ी में अब बिहार शिक्षा बोर्ड से भी पुस्तकों के माध्यम से ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार को रोकने की मांग की जा रही है।

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