पहले पाकिस्तान के हिंदुओं को नागरिकता, अब मृतकों की भी पूरी होगी अंतिम इच्छा! ऐसी है भारत सरकार की नई नीति

विदेश में रहनेवाले हिंदुओं के लिए हरिद्वार और गंगा हमेशा ही आस्था का केंद्र हैं। पाकिस्तान में रहनेवाले हिंदू अनगिनत अत्याचार और विद्वेष सहने के बाद भी अपने जीते जी भले ही भारत न आ पाएं लेकिन मृत्यु के पश्चात अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने की इच्छा रखते हैं।

Asthi Visarjan

मोदी सरकार का संशोधित नागरिकता कानून पर लिया गया निर्णय पाकिस्तान-अफगानिस्तान के हिंदुओं के लिए सहायक बन गया। अब नए निर्णय के अनुसार नीति में परिवर्तन ने पाकिस्तान के मृतकों की अंतिम इच्छा पूरा करने का काम किया है। इससे 426 हिंदुओं की अस्थियों को उनकी आस्थाओं के अनुसार विसर्जित करने का मार्ग खुल गया है।

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने स्पॉन्सरशिप नियमों में बदलाव किया है। जिसके अनुसार अब पाकिस्तान के वह हिंदू जिनके परिजनों की अस्थियों को हरिद्वार में गंगा नदी में विसर्जित किया जाना है, उन्हें दस दिनों का वीज़ा भारत सरकार उपलब्ध कराएगी।

पहले का नियम बना रोड़ा
पाकिस्तान में बँटवारे के बाद भी बड़ी संख्या में हिंदू रह गए थे। उसमें कराची के सोल्जर बजार, रणछोड़ लाइन में एक से डेढ़ लाख हिंदू रहते हैं। इसके अलावा थरपाकर जिले में लगभग पांच लाख हिंदू कुनड़ी, नगरपारकर, इस्लामकोट क्षेत्र में रहते हैं। हिंदू आस्थाओं के अनुरूप इसमें से कई ऐसे हैं जो अपनी मृत्यु के पश्चात अस्थियों को हरिद्वार में गंगा में विसर्जित करने की इच्छा व्यक्त करते हैं। लेकिन भारत सरकार की पहले की नीति के अनुसार मृतकों के परिजनों को तब तक भारत आने की अनुमति नहीं मिलती थी, जब तक भारत से कोई स्पॉन्सरशिप नहीं देता।

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नई नीति से 426 हिंदुओं को मुक्ति
पाकिस्तान में हिंदुओं के विभिन्न स्मशान गृहों में 426 मृतकों की अस्थियां गंगा में विसर्जन की राह देख रही हैं। इसमें कराची के ओल्ड गोलीमार अस्थि कलश पैलेस में लगभग 300 अस्थि कलश रखे हैं, इसके अलावा अन्य स्थानों पर अस्थियां रखी गई हैं। कराची के सोल्जर बजार के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर के महंत श्रीराम नाथ ने बताया कि, पाकिस्तान में रखी अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने के लिए भारतीय दूतावास से लंबे काल से बातचीत की जा रही है। अब दूतावास ने हमें अच्छी सूचना दी है।

नया नियम जानें
भारत सरकार द्वारा पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए वीज़ा नीति में परिवर्तन किया गया है। जिसके अनुसार अब अस्थि विसर्जन के लिए मृतक व्यक्ति के परिजन को दस दिनों का वीज़ा दिया जाएगा। जिसमें परिवार जन हरिद्वार आकर गंगा नदी में अस्थि विसर्जन कर पाएंगे। इस कार्य के लिए अब स्पॉन्सरशिप की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है।

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