मिठ चौकी की ट्राफिक से जनता त्रस्त, मंत्री-संतरी मस्त

मार्वे रोड की समस्या लंबे काल से विकराल रही है। लेकिन इसका समाधान किसी ने ढूंढने की कोशिश नहीं की है।

मुंबई के पश्चिमी उपनगर मालाड अति जनसंख्या वाला क्षेत्र है। मालाड पश्चिम का क्षेत्र मढ आईलैंड, मनोरी-गोराई और म्हाडा गायकवाड नगर तक विस्तृत है, जहां के निवासियों का आवागमन मात्र मार्वे रोड से होता है। परंतु, मिठ चौकी की गड्ढा युक्त सड़क और भयंकर ट्राफिक ने निवासियों को त्रस्त कर दिया है, जबकि इस क्षेत्र के नेता और यातायात पुलिस सब मस्त हैं।

वर्ष 2011 की जनगणना से ही स्पष्ट हो गया था कि, मालाड का पी-उत्तर मनपा वॉर्ड सबसे अधिक जनसंख्या वाला वॉर्ड है। इसके साथ ही इस वॉर्ड की समस्याएं भी बड़ी हैं। परंतु, वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या है आवागमन की। मालाड पश्चिम से 13 किलोमीटर दूर है मढ आईलैंड और मार्वे बीच से मनोरी-गोराई तक यह क्षेत्र विस्तृत है। जहां के लोगों का आवागमन मार्वे रोड पर आधारित है। इसके अलावा मालवणी, म्हाडा तक के लोग मार्वे रोड से ही अपने गंतव्य तक होकर गुजरते हैं। इसके कारण यह सड़क चौबीस घंटे गाड़ियों की आवाजाही से व्यस्त रहती है। परंतु, इस सड़क से यात्रा करने में लोगों को घंटों ट्राफिक में अटके रहना पड़ता है। इसका समाधान निकालने में न नेताओं की रुचि है और न ही प्रशासन की।

पूर्व मंत्री का है क्षेत्र
मालाड विधान सभी कांग्रेस के विधायक अस्लम शेख का क्षेत्र है, जो उद्धव ठाकरे सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और मुंबई शहर के पालक मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद भी मार्वे रोड गड्ढे की मार लगातार झेल रहा है। विधायक के मालवणी एक नंबर में स्थित कार्यालय के सामने से गुजरने वाले मार्वे रोड पर गड्ढे दिख जाएंगे और अनियंत्रित फेरीवाले, पार्किंग ट्राफिक जाम किये रहते हैं। परंतु, जनता की चिंता लगता नहीं है नेता जी को है।

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राजनीतिक दलों की सिर्फ चमकोगिरी
मालवणी क्षेत्र लगातार स्लम से पटता जा रहा है। इस क्षेत्र में मतदाता भी लगातार बढ़ रहे हैं। इसके कारण भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना, कांग्रेस सभी सक्रिय हैं। यह क्षेत्र भाजपा सांसद गोपाल शेट्टी के क्षेत्र में भी लगता है। इसके साथ ही कांग्रेस के विधायक अस्लम शेख हैं। जबकि शिवसेना और भाजपा की नगरसेविकाएं रह चुकी हैं। लेकिन, सड़क की समस्या सुलझाने में किसी को कोई रुचि नहीं है। जिसके कारण मार्वे रोड के प्रवासियों को घंटों ट्राफिक में गुजारना पड़ता है।

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